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ISSN 2292-9754

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10.01.2014


जगमगाती शाम लेकर आ गया हूँ

जगमगाती शाम लेकर आ गया हूँ
मत डरो, पैग़ाम लेकर आ गया हूँ

हम सभी गद्दार हैं, हक़ माँगते हैं
सर पे ये इल्ज़ाम लेकर आ गया हूँ

फिर गरीबों को उदासी बाँटकर
मैं ज़रा आराम लेकर आ गया हूँ

सब यहाँ तलवार लेकर आ गए हैं
मैं तुम्हारा नाम लेकर आ गया हूँ

आत्मा तुमने बहुत सस्ते में बेची
मैं तो ऊँचे दाम लेकर आ गया हूँ

आज अपने साथ मैं रोटी नहीं
कुछ ज़रूरी काम लेकर आ गया हूँ


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