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ISSN 2292-9754

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12.09.2015


ज़मीं उनकी है आसमां नसीब नहीं

ज़मीं उनकी है आसमां नसीब नहीं
बड़ी मुश्किल है ये जहां हबीब नहीं

लगे सरमायेदार की जहां व ज़मीं
कदम रख पाऊँ आसमां करीब नहीं

सुनूँ उनकी यारब कहूँ नज़ीर कभी
बँधे उनकी बाहें यहाँ ज़रीब नहीं

दर्द अपना कोई कहे शरीफ़ नहीं
करें इंसाफ़ अगर बना सलीब नहीं


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