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08.06.2007
 

 

कभी बादल कभी बिजली कभी बरसात की तरह

आर.पी. घायल

 

कभी बादल कभी बिजली कभी बरसात की तरह
मिली है ज़िन्दगी मुझको किसी सौग़ात की तरह

मैं जिसके साथ होता हूँ उसी के साथ होता हूँ
जुदाई में भी होता हूँ मिलन की रात की तरह

समझ पाता नहीं हूँ मैं किसी की बात का मतलब
सभी की बात लगती है उसी की बात की तरह

किसी की याद के जुगनू कभी जब जगमगाते हैं
तभी अल्फ़ाज़ सजते हैं किसी बारात की तरह

जिसे देखा किया 'घायल' बिना देखे भी हर लम्हा
बिना उसके भी सुनता हूँ उसे नग़्मात की तरह

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