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06.11.2007
 
ग़रीबी रोग से हर दिन हमें लड़ना सिखाती है
आर.पी.’घायल


ग़रीबी रोग से हर दिन हमें लड़ना सिखाती है
हमेशा बिन किताबों के हमें पढ़ना सिखाती है

गरीबी आदतन इंसान को रोने नहीं देती
पसीने में नहाकर भी खुशी गढ़ना सिखाती है

ग़रीबी तोड़ देती है अमीरों ने कहा लेकिन
ज़मीनो आसमानों से हमें जुड़ना सिखाती है

ग़रीबी की हथेली पर उम्मीदों की है जो बाती
उदासी के अंधेरों में हमें बढ़ना सिखाती है

ग़रीबी को हिकारत से भला हम किस तरह देखें
नज़र को शर्म से झुकना हमें गड़ना सिखाती है

ग़रीबी मोम होती है कभी पत्थर नहीं ‘घायल’
मगर नफ़रत की आँधी से हमें लड़ना सिखाती है

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