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07.14.2007
 

आपको  अपनी  अदा की  ताज़गी  पर  नाज़  है

आर.पी. घायल

 

आपको  अपनी  अदा की  ताज़गी  पर  नाज़  है

हमको भी अपनी  वफा  की  सादगी पर नाज़  है

 

आपसे  लिपटी  हुई  पुरवाई  को  हम  क्या  कहें

आपको   पुरवाई   की   आवारगी  पर  नाज़   है

 

आपकी  आँखों  ने  हमसे तल्ख़ियों  में बात  की

आपको आँख की इस  नाराज़गी  पर   नाज   है

 

आपने दिल  के जो टुकडे कर दिये तो क्या  हुआ

हमको अपने  दिल  की इस दीवानगी पर नाज़  है

 

आपको  घायल   मुबारक  आपकी   संजीदगी

हमको   हँसती-खेलती  इस ज़िंदगी  पर नाज़ है



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