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06.17.2007
 
आपने पूछा मुझे तो पूछना अच्छा लगा
आर.पी. घायल

आपने पूछा मुझे तो पूछना अच्छा लगा
आपकी आँखों में ख़ुद को देखना अच्छा लगा

आपसे तो दर्द ही मिलता रहा मुझको मगर
फिर भी ऐसे दर्द में ही डूबना अच्छा लगा

जब लगा ख़ामोशियों से दम मेरा घुट जायेगा
आपकी साँसों का मुझसे बोलना अच्छा लगा

दोपहर की धूप से जब मैं परेशां हो गया
आपकी परछाँइयों को ढूँढना अच्छा लगा

आँसुओं में भी मुझे ‘घायल’ ख़ुशी मिलती रही
मुझको ऐसी हर ख़ुशी में भीगना अच्छा लगा


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