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06.03.2012


कहते हैं आँसू मोतियों से कम नहीं होते

कहते हैं आँसू मोतियों से कम नहीं होते
नायाब ही रहते जो दिल में ग़म नहीं होते

हमको ही जीने का शउर आया नहीं वरना
कुल चार दिन भी ज़िंदगी के कम नहीं होते

यूँ ज़िंदगी होती तो होती ज़िंदगी कैसी
ख़ुशियाँ ही ख़ुशियाँ होती जिसमें ग़म नहीं होते

औरों की पीड़ा देख कर अक़्सर बहे नैना
इक मेरे ही ग़म में कभी पुरनम नहीं होते

मुद्दत से पुरू बाहम रहे-दिल पे रवां हैं हम
पर फ़ासले जो दरमियां हैं कम नहीं होते



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