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| 05.22.2009 |
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जिसने ताउम्र अँधेरा सहा है |
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जिसने ताउम्र अँधेरा सहा है हादिसे से घिरे क्या तुम्हीं हो? यूँ ही हर सू नहीं ये चरागां दे रहा है सज़ा दर सज़ा तू हम जिसको कर सके ना बयां ’पुरू’ |
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