अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली

मुख पृष्ठ
06.03.2012


 ग़म अगर दिल को मिला होता नहीं

ग़म अगर दिल को मिला होता नहीं
ज़िंदगी में कुछ मज़ा होता नहीं

ज़ीस्त की रह में है दिल तनहा तो क्या
हर सफ़र में काफ़िला होता नहीं

हम सदा हालात को क्यों दोष दें
क्या कभी इंसा बुरा होता नहीं

मैं हमेशा साथ रहता हूँ तेरे
तू कभी मुझसे जुदा होता नहीं

एक इक पल बोझ-सा लगता है जब
जेब में पैसा-टका होता नहीं

सबकी आँखें पुरु कहाँ होती हैं नम
हर किसी दिल में ख़ुदा होता नहीं


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें