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ISSN 2292-9754

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01.01.2015


गालियाँ माँ की दी नहीं होती

गालियाँ माँ की दी नहीं होती
दुश्मनी तुमने ली नहीं होती

भूल किससे कभी नहीं होती
किस बशर में कमी नहीं होती

फिर से आयी तो हमने ये जाना
हर बला आख़री नहीं होती

धूप-बारिश की मेहरबानी है
वरना चटकी कली नहीं होती

जाने क्या बीतती मेरे सर पर
साथ गर तू खड़ी नहीं होती

तुझको अपना बना नहीं पाता
मर्ज़ी दिल की चली नहीं होती

`प्राण` उट्ठे भले ही काली घटा
चाँदनी काली सी नहीं होती


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