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07.04.2008
 

बड़ा कौन - लक्ष्मी या सरस्वती (भोजपुरी लोक कथा)
प्रभाकर पाण्डेय


इस कहानी में ज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डाला गया है। संस्कृत में भी कहा गया है "विद्या धनम् सर्व धनम् प्रधानम्"। इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि ज्ञान की महिमा सर्वोपरि है। ज्ञानी की पूछ हर जगह होती है।

 

एक बार लक्ष्मी और सरस्वती में यह बहस होने लगी कि हम दोनों में बड़ा कौन है? लक्ष्मी माँ कहती थीं कि मैं बड़ी हूँ और सरस्वती माँ कहती थीं कि मैं। बहुत समय तक बहस चली लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। अभी बहस चल ही रही थी तभी वहाँ से एक भिखमंगा गुजरा। लक्ष्मी माँ ने कहा कि मैं इस भिखमंगे को अमीर बना दूँगी इस पर सरस्वती माँ ने हँसकर कहा कि मैं ऐसा नहीं होने दूँगी। इसके बाद माँ लक्ष्मी ने भिखमंगे के रास्ते में सोने की ईंट गिरा दीं और हर्षित हो गईं कि सोने की ईंट पाकर भिखमंगा अमीर हो जाएगा।

भिखमंगा अभी सोने की ईंट के दो चार कदम इधर ही था तभी माँ सरस्वती की उसपर कृपा हो गई। भिखमँगा सोचा कि मेरे पास तो दृष्टि है, सबकुछ अच्छी तरह से दिखाई दे रहा है इसके लिए चलने में भी परेशानी नहीं हो रही है लेकिन अंधे लोग कैसे चलते होंगे? थोड़ा मैं भी अंधा बनकर देखूँ। इसके बाद भिखमंगा आँख बंद करके चलने लगा और सोने की ईंट को पार कर गया। माँ लक्ष्मी ने अपना सर पीट लिया और माँ सरस्वती को अपने से बड़ा मान लिया।


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