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ISSN 2292-9754

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10.02.2017


इश्क़ का ख़ुमार

हमारा इंतज़ार, उनका आना
और यूँ ही सर झुकाए गुज़र जाना
मानो पतझड़ में सावन का आना

मालूम है उनको कि
इंतज़ार हम उनका ही करते हैं
बताता है उनका धीमे से मुस्कुरा कर चले जाना

दीदार उनका पाकर
मेरे चेहरे का खिल जाना
लगता है पल भर में बरसों जी जाना

न तड़प है ना तिश्नगी
मुकम्मल होना मेरे इश्क़ का
उनका आना और चले जाना

है मुख़्तसर सा तो
इश्क़ उनको भी हमसे
बताता है उनका उसी गली से गुज़र जाना

चढ़ रहा है ख़ुमार
धीरे धीरे इश्क़ का
बताता है अलसुबह उनका चेहरा याद आना


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