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ISSN 2292-9754

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06.28.2014


काबा कलीसा न कोई शिवाला है

२२१ २२१ २२१ २२२

काबा कलीसा न कोई शिवाला है
ये इश्क़ दुनिया में सबसे निराला है

बैसाखियाँ दर्द कहती हैं कह लें अब
हमराह है पाँव में जो ये छाला है

अब समझा मैं क्यों करे याद तुझको दिल
तेरी अमानत है बस मैंने पाला है

मुश्क़िल हुआ तुझसे अब मिलना मेरे रब
हर गाम पहरा है हर दर पे ताला है

है काम ये भी ज़रूरी इबादत से
सबसे ज़रूरी भूखे का निवाला है

'गुमनाम' अब रास्ता देखना ही है
शहरों ने नातो को मार डाला है


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