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ISSN 2292-9754

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10.06.2017


ऊपर वाले को तार

खीझ तो जाते होगे ना तुम
जब दूध दही और बेल पत्रों से तुम्हें रगड़ते हैं
तुम्हारे ही बाग़ से फूल नोचकर
तुम पर ही नज़र करते हैं
कभी मंगला में सुबह चार बजे
कभी अज़ान में रोज़ाना पाँच दफ़े
तलवे घिसते आते हैं फ़रियादी मीलों से
गीली आँखो से गिरती इनकी मन्नतें क़बूलो
नहीं तो भक्तों की बेरुख़ी झेलो
तुम्हारे पल्लू से बाँध जाते हैं ये
अपने दर्द और अपनी फ़िक्र कसकर
कुछ भी माँग लेते हैं, बड़े मँगते हैं
ना दो तो तुम्हारी शामत
और देने पर फिर हज़म ना हो
तब भी तुम पर ही तोहमत
एक बार आ जाओ और सबको बता जाओ
"चिराग घिसने से नहीं निकला
ख़ुदा हूँ मैं
तेरी आहें सुन कर आया हूँ
तुम्हारी ज़रूरतें तुम से बेहतर जानता हूँ
जिन्न नहीं कि हर हुक्म बजाऊँ
गुलाम नहीं हूँ तेरा
की तेरी हर मुराद का मुरीद हो जाऊँ"

खैर.......
एक बार आ जाओ और
गाईडलाइन्स फिर से बता जाओ
बंसी छोड़ो और चक्र चला दो
आप बिज़ी हो तो नंद बाबा ही भिजवा दो
अगले पिछले जन्म का छोड़ो
सब इसी जन्म में करवा दो
यहाँ के हालात बहुत संगीन हैं
आपके अस्तित्व पर भी प्रश्नचिह्न है
थोड़ा लिखा ज़्यादा समझना
बाक़ी तो आप ख़ुद भगवान हैं


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