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ISSN 2292-9754

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01.23.2019


विधानसभा में भूत

अमुक देश के अमुक राज्य की विधानसभा में इस बात को लेकर बहस हो रही थी कि किस विधायक की टिविटर पर फ़ैन फ़ॉलोविंग सबसे अधिक है।"अ" क्षेत्र के मौज़़ूदा विधायक मांगे लाल ने खड़े होकर कहा- "सभापति जी, हमारी पार्टी के विधायक, श्री राम उधार पांडे जी के 75 लाख फ़ॉलोवर हैं। वही इस दौड़ में सबसे आगे हैं।"

"हक बढ़ाओ पार्टी" के उदयलाल ने विरोध किया- "श्रीमान जी, "एम.बी.के. पार्टी" के मौजूदा विधायक माँगे लाल जी सरासर सफ़ेद झूठ बोल रहे हैं। इस राज्य की कुल जनसंख्या 75 लाख है। जिसमें से साठ फ़ीसदी अँगूठा छाप ग़रीब मजदूर-किसान हैं। भूखमरी के कारण इनकी आँखों में रतौंदी उतर आई है। ये केवल अपने बच्चों का खाली पेट ही टटोल सकते हैं। राज्य के तीस फ़ीसदी युवा बेरोज़गारी से विक्षप्त हैं। बाक़ी के नये होते युवा फ़िलहाल "प्रेम" में उलझे हैं। उन्हें अपने-अपने प्रेमियों के चेहरे में साक्षात्‌ भावी मुख्यमंत्री नज़र आता है‍। वेे केवल और केवल एक-दूसरे को फ़ॉलो करते हैं।"
सभा में शोर होने लगा- "देखो रूलिंग पार्टी कितनी करप्ट है। फ़र्ज़ी डाटा ख़रीदकर फ़ैन फ़ॉलोइंग बढ़ा रखी है। झूठ के बल पर राज करना चाहते हैं।"

"शेम... शेम... शेम... शेम... शेम...।"

सभापति ने मेज़ थपथपाई- "साइलेंस प्लीज़। साइलेंस।"

सुसज्जित पार्टी के तेज़ तररार नेता नतीज़ा दास से चुप न रहा गया- "श्रीमान जी, "एम. बी. के. पार्टी" के नेता पिछले पंद्रह सालों से सत्ता न मिल पाने के कारण स्वंय से विक्षिप्त हो चले हैं। इन्हें अपनी पार्टी के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता।"

सभापति ने माइक ठीक करते हुये "सुसज्जित पार्टी" के तथाकथित विधायक, राम भरोसे को चेतावनी दी- "हाउस की मर्यादा का ख़्याल रखिये भरोसे लाल जी... वरना, आपको सदन से बाहर निकाला जा सकता है।"

भरोसे लाल के कान के पास काफ़ी देर से एक मच्छर गुनगुना रहा था। इस बार एक ही थप्पड़ से उसका काम तमाम करते हुये वे बुड़बुड़ाये- "साली.. ऐसी की तैसी तेरी...। ढंग से काम भी नही करने देता।" पूरा सदन ठहाकों से गूँज गया।

सभापति महोदय चिल्लाये- "साइलेंस प्लीज़... साइलेंस।" उन्होंने "एच. बी. एच. एल. एम. पार्टी" के बाहुबली नेता छल्लालाल की ओर इशारा करते हुये कहा- "छल्लालाल जी, इस टॉपिक पर आपकी क्या राय है?"

छल्लालाल जी "ए.सी." की ठंडक में सोये हुये थे।.. अचानक हड़बड़ी में आँख मलते हुये उठे- "कोउ हमें बताये .... कि हियां चल का रहा है।" साथ बैठी नेत्री ने कहा - " विधायक जी यहाँ विकास पर बहस हो रही है।"

छल्लालाल की आँखों में एकाएक खून उतर आया। गमछा कमर में बाँधते हुये गरजे- "हिंया कोई है माई का लाल जो उसका बाल भी बांका कर सके। बिटवा है हमार.. बिटवा। हमारे अंडर काम करता है। फालतू में मीडिया उसे रेप केस में फँसा रहा है। मिडिया ट्रायल हो रहा है उसका। पर जान लियो.. ई सब बरदाश्त नहीं किया जायेगा। ससूरी पार्लियामेंट ठप्प कर देंगे।” छल्लालाल जी ग़ुस्से में एकाएक अवधी बोली बोलने लगते हैं।

साथ बैठी नेत्री ने साफ़ किया- "विधायक जी, यहाँ आपके विकास की नहीं.. देश के विकास की बात हो रही है।"

छल्लालाल जी मुस्कराये और पसीना पोंछते हुये बोले- "अच्छा.. उ विकास। सभापति जी, मैं इस सदन को बताना चाहता हूँ कि जब से हमारी सरकार बनी विकास ही होय रहा है। चौतरफा विकास ही विकास है। घर-घर विकास है। हमारी सरकार के विज्ञापन मा देखे नाहीं हो.. कितना विकास हुआ है।"

ऑपोज़ीशन को छल्लालाल का आलाप पसंद नहीं आया। कोरस में एक तरफ़ा चिल्लाये, “सब झूठ। सब झूठ। छल्लालाल सरेआम फेंक रहे हैं।"

विपक्षी नेता राम अधीर ने खड़े होकर कहा- "हम माननीय मंत्री जी से पूछना चाहते हैं कि विकास कहाँ हुआ है? सरकार बताये कि इनके कार्यकाल में राज्य में कितने लोग भूख से मरे? सरकार अब तक कितने युवाओं को रोज़गार देने में कामयाब रही है? गाँवों में कितने नये शौचालय बनाये गये हैं? कितने गाँवों में बिजली आई है? हमारे यहाँ इंटरनेट की स्पीड पड़ोसी देशों से कम क्यों है? क्या ऐसे ही हमारे यहाँ डिजिटलाइज़ेशन होगा?"

छल्लालाल ने उँगली उठाते हुये कहा- "महोदय, मैं बेहद हैरान हूँ। विपक्षी नेताओं को कहीं भी विकास नहीं दिख रहा है। मैं इस सदन से गुजा़रिश करना चाहता हूँ कि कि विपक्षी भाइयों के लिये "थ्री-डी चश्में" मँगवाये जायें ताकि इन्हें विकास दिख सके।”

अचानक सदन के मुख्य दरवाज़े के खुलने की आवाज़ हुई। लेकिन वहाँ कोई नहीं था। सदस्य आँखें फाड़े दरवाज़े की ओर देखने लगे। वातावरण में डैडलॉक पैदा हो गया। छल्लालाल ने अनुभव किया कि उनकी साथ वाली खाली सीट पर कोई आकर बैठा है। कुछ विधानसभा सदस्य भूत-भूत चिल्लाने लगे। सभापति महोदय पर इसका कोई असर नहीं हुआ। नेता बनने से पहले वे ओझा थे। अपनी गली में उन्होंने बहुत से लोगों के भूत उतारे थे।

सभापति ने चुप्पी तोड़ते हुये रूलिंग पार्टी के नेता छल्लालाल से कहा- “घबराइये नहीं छल्लाराम जी, कुछ नहीं होगा। मुझ पर सॉलिड भरोसा रखिये।"

छल्लालाल ने अपनी बड़ी-बड़ी मूँछों को उमेठते हुये कहा- "अरे हम कहाँ डरते हैं इन सब से। हमारे साथ हमारे प्राइवेट गनमैन रहते हैं।"

सदन में उपस्थित सदस्य चीखे- "विकास... विकास।"

वे फिर गुस्से में ताल ठोंक कर बोले- "विकास हमार बिटवा है। मिडिया ट्रायल नहीं होने देंगे।"

साथी नेत्री ने सुधारा- "देश के विकास की बात हो रही है छल्लालाल जी।"

वे बोले- "हमारी सरकार ने पिछले एक साल में पाँच लाख युवाओं को रोजगार दिये। पच्चास हजार बेघरों को आसान किस्तों पर घर दिये। दो लाख किसानों के कर्ज माफ किये।"

विपक्षी चिल्लाये- "झूठ। झूठ।... शेम.. शेम शेम।"

विपक्ष के एक नेता ने पर्सनल अटैक किया - "आपके साँढ़ू पर ग़रीब किसानों की ज़मीनें हड़पने का आरोप है। उसके बारे में आप क्या कहेंगे?"

रूलिंग पार्टी के शहरी विकास मंत्री ने कहा- "उसकी जाँच चल रही है।"

विपक्षी नेता ने कहा- "जाँच कब पूरी होगी।"

मंत्री ने कहा- "कह नहीं सकते। क़ानून अपना कार्य कर रहा है। हम आपकी तरह क़ानूनी प्रक्रिया में दख़ल नहीं देते।"

विपक्षी नेता ने कहा- "क़ानून आपका तोता हो गया है।" कुछ सदस्य तोते की आवाज़ निकालने लगे।

एक सदस्य ने पूछा- "बेरोज़गारों को नौकरियाँ कब तक मिलेंगी। सरकार अपने प्लान का ख़ुलासा क्यों नहीं कर रही?"

रूलिंग पार्टी के नेता ने कहा- "हम अपनी नीतियों को सार्वजनिक नहीं कर सकते।"

विपक्ष ने कहा- "आपको बताना होगा। आपको यहाँ हमने भेजा है। हमें पूछने का हक है।"

रूलिंग पार्टी के नेता ने कहा- "हम कुछ नहीं कह सकते। हमारे हाथ परम्पराओं व नीतियों से बँधे हैं। आप लोगों के दवाब में आकर मैं अपनी पार्टी की नीतियों को नहीं छोड़ सकता।"

सभापति महोदय चिल्लाये- "साइलेंस प्लीज़... साइलेंस।"

एक मसखरा नेता तनिक ज़ोर से फुसफुसाया- "चुप ही तो हैं। यहाँ बोलने की हिमाक़त आपके अलावा कर ही कौन सकता है।"

सभापति ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। छल्लालाल की ओर इशारा करते हुये बोले- "आप चालू रहिये।"

छल्लालाल जी धीरे से खंखारते हुये बोले- "सभापति जी, हम यह कहना चाहते हैं कि हमने देश के लिये बहुत काम किया हैं। विपक्ष से हमारी पॉपुलरिटी देखी नहीं जा रही। हम विपक्ष की चाल को कामयाब नहीं होने देंगे। हमारी सरकार ने... उन्हें फिर से खाँसी आने लगी...।" नेत्री ने पानी पिलाया लेकिन गला साफ़ नहीं हुआ। खाँसते हुये बोले- "दरअसल, हम झूठ बोल रहे हैं। केन्द्र सरकार जो पैसा हमें गाँवों में शौचालय बनवाने के लिये भेजती हैं। हम उसे साथी व्यापारियों की मदद से अपने भतीजे की विदेशी कंपनी में लगा देते हैं और यहाँ शौचालयों की फोटो पर पैसा रिलीज़ करवा कर के रिकार्ड में एडजस्टमेंट दिखा देते हैं। हिसाब बराबर। भूल-चूक लेनी-देनी माफ।"

विपक्षी चिल्लाये- "शर्म करो। शर्म करो। शर्म करो।"

सभापति चिल्लाये- "साइलेंस प्लीज़... साइलेंस।" लेकिन कोई चुप होने के लिये तैयार नहीं।

रूलिंग पार्टी के विधायक छल्लाराम की इस हरकत से आवाक रह गये। पार्टी लाइन से बाहर जाता देख रूलिंग पार्टी से विधायक राम धीरज ने बचाव किया- "महोदय, आज फ़र्स्ट अप्रैल है। और, छल्लाराम जी स्वभाव से ही बहुत मज़ाकिया हैं। मज़ाक कर रहे हैं।"

विपक्षी चिल्लाये- "झूठ। झूठ.... शेम.. शेम शेम।"

विपक्ष से विधायक प्रोफैसर संजय ने कहा- "रूलिंग पार्टी के सदस्य सदन को गुमराह कर रहे हैं। मैं गणित का प्रोफैसर रहा हूँ। आज एक नहीं दो अप्रैल है।"

रूलिंग पार्टी के विधायकों ने कहा- "क्या सबूत है कि आज दो अप्रैल है।"

विपक्ष ने कहा- "सभी कलैंडर कहते हैं।"

रूलिंग पार्टी के विधायक बोले- "कलैंडरों में ग़लती भी हो सकती है। सदन चाहे तो बृहस्पति जी से वैरीफ़ाई करवा सकता है।"

विपक्ष ने कहा - " बृहस्पति जी इस कलयुग में नहीं आ सकते।"

सदन में शोर होने लगा।

सभापति चिल्लाये- "साइलेंस प्लीज़... साइलेंस।"

लेकिन शोर जारी रहा।

सभापति ने सदन को जानकारी दी कि उन्हें अभी- "अभी वाटसअप मैसेज़ मिला है कि आज दो अप्रैल ही है।"

विपक्षी एक सुर में चिल्लाये- "सरकार को सदन से माफ़ी माँगनी चाहिये।" सदन में तू-तू.. मैं-मैं होने लगी।

सदन में कोने की कुर्सी पर बैठे निर्दलीय विधायक आत्माराम लगातार सोचे जा रहे थे कि पिछले चार दिनों से अचानक रूलिंग पार्टी के नेता सच कैसे बोलने लग जाते हैं। विधायक आत्माराम धर्म-कर्म में विश्वास रखते थे। भगवान की पूजा किये बिना वे घर से नहीं निकलते थे। वे रहस्य जानना चाहते थे। उन्होंने दोनों हाथ जोड़े। आँखें मूँदी और प्रभु-भक्ति में लीन हो गये। इसी मुद्रा में उन्हें दिव्य-ज्ञान प्राप्त हुआ। वे सारी बात समझ गये। खड़े होकर उन्होंने कहा- "सभापति महोदय, सदन में भूत है।"

सदन के सभी सदस्य वयोवृद्ध विधायक आत्माराम का सम्मान करते थे। सभी उनके आत्मज्ञान से परिचित थे। सदस्य भूत-भूत चिल्लाने लगे। सभी सदस्य विधायक आत्माराम की कुर्सी के आस-पास दुबक गये।

सभापति ने डरते हुये कहा- "साइलेंस प्लीज़... साइलेंस।"

इस बार सचमुच सदन में सन्नाटा छा गया।

विधायक आत्माराम ने अपना वक्तव्य जारी रखा - "महोदय.. यह "महुआपुर सीट" से विधायक रहे "पंडित सच्चिदानंद" जी का भूत है।"

सच्चिदानंद दास एक ईमानदार नेता थे। उन्होंने अपने लिये कभी कुछ नहीं माँगा। वे अपना तन-मन धन लोगों की सेवा में लगा देना चाहते थे। अपने कार्यकाल में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र के लिये भरपूर काम किये। गाँवों को शहरों से जोड़ने के लिये सड़कें बनवाई। हर गाँव में बच्चों के लिये सरकारी स्कूल खुलवाये। पीने के पानी की सुविधा मुहैया करवाई। वे महुआपुर में सचमुच का रामराज्य लाना चाहते थे लेकिन सड़क दुर्घटना में आक्सिमिक मौत ने उनका रामराज्य का सपना अधूरा कर दिया। कहते हैं जीवन-काल में अगर इच्छाएँ पूरी न हो पायें तो मनुष्य की आत्मा भटकती रहती है। वह भूत बन जाता है।

विधायक आत्माराम ने सदन को बताते हुये कहा- "सच्चिदानंद का भूत पिछले चार दिनों से लगातार सदन में आ रहा है। वह यहाँ बैठ कर सदन की कार्यवाही देखता है और जो भी विधायक झूठ बोलता है। उसके शरीर में घुस जाता है। विधायक ख़ुद-ब ख़ुद सच बोलने लगता है। कोई भी रणनीति उसके आगे नहीं चल सकती। भूत का कहना है कि वह तब तक सदन से नहीं जायेगा जब तक सभी विधायक जनता के प्रति आपने दाायित्व को पूरा नहीं करते। वह उन सभी विधायकों को डराता रहेगा जो अपने चुनावी वादों को पूरा नहीं करते। मैंने अपने सोर्सिस से पता लगाया है कि वह दोपहर के दो बजे तक सक्रिय रहता है।"

झल्लाराम ने बीच में टोका- "पर, ऐसे तो हम आगामी इलैक्शन हार जायेंगे। सभापति जी आप इस भूत का कुछ इलाज कीजिये।"

विपक्ष ने झाड़-फूँक की सलाह दी।

रूलिंग पार्टी के एक विधायक ने सुझाव दिया- "सदन में हवन कराया जाये। महामृत्युंजय का पाठ करावाया जाये। 21 पंडितों का भोजन करवाया जाये।"

विपक्ष के सदस्यों ने कोरस में कहा- "सभपति जी, भूतों का इलाज जितना अच्छा आपके पास है किसी के पास नहीं।"

विपक्ष के एक विधायक ने सुझाव दिया- "सदन में सप्ताह में एक दिन भूतों पर भी चर्चा होनी चाहिये। सदन में इसके लिये भी टाइम फ़िक्स होना चाहिये। भूत हमारे पूर्वजों के ज़माने से चले आ रहे हैं। साईंस तो अब आई है। हमें इन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिये।"

एक नौजवान विधायक ने पूछा- "ये भूत क्या होता है?"

संसदीय मंत्री ने सभापति से कहा - "यहाँ सवाल आम जनता का है। हम सब जनता के नुमाइंदे हैं। हमें जनता ने भेजा है। हमें आगे भी अपनी जनता का प्रतिनिधित्व करना है। हम विपक्ष के प्रस्ताव से सहमत हैं। सरकार इस पर बहुत जल्दी ही एक ऐसी नीति बनायेगी जिसके तहत सदन की कार्यवाही में बाधा डालने वाले किसी भी शख़्स को बक्शा नहीं जायेगा।"

वे आगे बोले- "महोदय मेरी आपसे प्रार्थना है कि जब तक हम इस संदर्भ में कोई पॉलिसी नहीं बना लेते तब तक के लिये सदन की कार्यवाही स्थगित की जाये।"

विपक्ष के सदस्य फिर चिल्लाये- "शर्म करो। शर्म करो। शर्म करो।"

सभापति ने सहर्ष मेज़ थपथपाई- "द हाउस इज़ एडर्ज़न टिल्ल नैक्स्ट सैशन।"


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