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ISSN 2292-9754

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01.23.2019


रखैल

अस्सी वर्षीया बसंती मृत्यु शय्या पर थी। गाँव की औरतों ने उससे कहा ....

"अरे! बसंती, अब तो ऊपरवाले से अपने कुकर्मों की माफ़ी माँग ले। तेरी आत्मा को शांति मिलेगी।"

"पति के मरने के बाद मैं पहलवान हरिसिंह की रखैल बन गई, इसलिए?"

"हाँ! इसीलिए!"

"यदि मैं पहलवान की रखैल ना बनती तो पूरे गाँव की बनती। हर कोई मुझे रौंदता। मैंने एक मज़बूत हाथ पकड़ लिया। किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं थी; जो मुझे आँख उठाकर भी देख सके।"

"लेकिन था तो ये ग़लत काम!"

"गाँव के रईसों ने किस घर को छोड़ा? ज़रा बता तो! मुझे किसी ने हाथ तक नहीं लगाया।"

यह कहते-कहते बसंती ने अपने प्राण त्याग दिए।


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