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05.31.2008
 
दिल तड़पकर रह गया ...
मुकेश कुमार मासूम


दिल तड़पकर रह गया, जब याद आई आपकी।
तारे गिनवाने लगी, हमको जुदाई आपकी।

सब कुछ पूछो, ये न पूछो रातें कैसे कटती हैं,
आहें भरती है ये तनहा, चारपाई आपकी।

दर्द भी थमने का अब तो, नाम तक लेता नहीं,
बेअसर सी हो चली है, वो दवाई आपकी।

भूल जाना तुम हमें, ख़त न लिखना अब कभी,
वर्ना इसको लोग कहेंगे, बेहयाई आपकी।

अर्ज़ है द्फ़नाइयेगा, उस जगह जानम मुझे,
जिस शहर, जिस गाँव में, तय हुई सगाई आपकी।

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