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ISSN 2292-9754

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01.21.2018


पीना
मूल लेखिका - गाब्रिएला मिस्त्राल (चिले, १९३८)
कविता शीर्षक- beber (बेबेर)
भाषा- स्पेनी
अनुवाद : डॉ. मयुरेश कुमार

डॉ. पेड्रो द अल्बा के लिए

रीयो ब्लांको की घाटी में,
जहाँ से आकोंकाग़ुआ की शुरुआत होती है,
मैं पीने के लिए आयी, मैं पीने के लिए उछली
एक झरने के नीचे,
जिसका पानी काफ़ी नीचे और तेज़ी से गिर रहा था
और गाढ़े एवम् सफ़ेद टुकड़ों में बँट रहा था।
उस ग़र्म सोते के नीचे मैंने अपना मुँह लगाया,
और उस शुद्ध पानी ने मुझे जला दिया,
और तीन दिन तक मेरे मुख से ख़ून रिसा
आकोंकाग़ुआ की उस घूँट की वजह से।

मुझे लोगों की चेष्टाएँ याद हैं
और वो चेष्टाएँ मुझे पानी देने की थीं।


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