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ISSN 2292-9754

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02.16.2018


हमेशा दोष मेरा ही रहा है

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फऊलुन

हमेशा दोष मेरा ही रहा है
मुझे भी अब यक़ीं होने लगा है

मैं उसकी इक ज़रूरत भर रही हूँ
मगर मेरी वो आदत बन गया है

खुदा के वास्ते ही सब लड़े हैं
यही मुद्दा हमेशा से रहा है

पकाई माँ ने रोटी चाँद की फिर
वो बच्चा रो के भूखा सो गया है

जो बोले झूठ वो ही है सिकंदर
ज़माने में यही होता रहा है

कहाँ जा कर मिटाऊँ याद तेरी
तेरी यादों से हर कूचा भरा है


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