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05.03.2012
 

तुमसे मिलना बातें करना अच्छा लगता है
मनोज अबोध


तुमसे मिलना बातें करना अच्छा लगता है
तुम भी लिखना मुझसे मिलकर कैसा लगता है

आते ही जाने की जब वो बातें करता है
उस पल मन में जाने कैसा-कैसा लगता है

यादों के मौसम में जब भी जिससे मिलता हूँ
मुझको तो हर चेहरा उसका चेहरा लगता है

मस्त हवा के झोंके जब-जब दस्त देते हैं
तुम आए हो अक्सर ऐसा धोखा लगता है

अहसासों की सोन नदी में डूबा रहता है
जाने क्यों फिर भी मन मुझको प्यासा लगता है

महक उठी है रजनीगंधा टीक दुपहरी में
उसने मुझको याद किया है ऐसा लगता है

सीपी शंख नदी फुलवारी घण्टों बतियाना
अमराई की छाँव,सभी अब सपना लगता है


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