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05.03.2012
 

दिल दीवाना एक तरफ़
मनोज अबोध


दिल दीवाना एक तरफ़
और ज़माना एक तरफ़

चिट्ठी-पत्री स्वप्न हुईं
आना-जाना, एक तरफ़

वो रहता है इस दिल में
ठौर-ठिकाना एक तरफ़

उसकी आँखे क्या कहिए
हिरन सयाना एक तरफ़

उस अफ़साने के आगे
हर अफ़साना एक तरफ़

दिल में ज़हन में, वो ही
वो नींद न आना, एक तरफ़


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