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05.01.2014


जी.डी.पी. का अद्भुत विस्तार

"कनछेदी! तुम्हें बहुत-बहुत हो बधाई, लगता है प्रधान मंत्री ने कोई लंबा हाथ मारा है भाई, अथवा भारी हुई है डालर में कोई कमाई।" मैंने कनछेदी को संसद के केन्द्रीय कक्ष में ही पकड़ कर कहा।

"अभी से ही क्यों दे रहे हो बधाई। अभी तो महंगाई पर काबू पाने और जी.डी.पी. बढ़ाने की बात ही गई है चलाई।" कनछेदी ने एक लंबी मुस्कान अपने चेहरे पर चिपकाते हुए उत्तर दिया। "अभी अभी प्रधान मंत्री, योजना आयोग के उपाध्यक्ष और वित्त मंत्री ने समाप्त किया है अपना गहन विचार कि जल्दी से जल्दी भारतीय वित्त व्यवस्था का किया जाये विस्तार। उसी के आधार पर पी.एम. ने अपना वक्तव्य ही दिया है, पर सरकार ने तो हमेशा की तरह अभी कुछ भी नहीं किया है।" कनछेदी ने किसी फिल्मी तारिका की भाँति इठलाते हुए कहा। "बहुत लंबे समय से पी.एम. कर रहे थे गहन विचार, ऊपर से कोई संकेत मिले तो जी.डी.पी.में किया जाए कुछ सुधार। अमेरिका ने चाहा है तो करना ही पड़ेगा एफ.डी.आई में विस्तार। इसी को ध्यान में रख कर कदम उठा रहे हैं, लोगों को लगता है कि हम अभी सपनों के महल बना रहे हैं।"

"पर मैं ऐसा नहीं मानता। अपने पी.एम. को भली आँति हूँ जानता। प्रधान मंत्री जी ने जो कुछ भी कहा है, जितना भी कहा है, वह तो सौ फीसदी सत्य होगा ही यह वह अर्थशास्त्री होने के कारण बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। उनकी भविष्यवाणी को दुनिया देखेगी यह बात वह दूसरों से अधिक स्वयं मानते हैं।"

"तो आपको भी लगता है कि जल्दी ही देश की किस्मत चमकने वाली है, हमारी अर्थव्यवस्था क्या वास्तव में दमकने वाली है।" कनछेदी की खुशी छिपाये नहीं छिप रही थी।

"मैंने ऐसा तो नहीं कहा। मेरा मतलब है कि प्रधान मंत्री ने जो कहा है वह तो होगा, डंके की चोट होयेगा। यह दूसरी बात है कि जल्दी ही देश खून के नौ-नौ आँसू रोयेगा।"

अब कनछेदी ओलंपिक में मेडल जीतते-जीतते हार जाने वाले खिलाड़ी की तरह चौंका। उसने मेरी व्यंग्य भरी बात को समझने के लिए वैसे ही सिर खुजलाना शुरु किया जैसे हमारे मंत्री संवाददाता सम्मेलनों में खुजलाया करते हैं और मैंने ऐसा तो नहीं कहा था कि रट लगाया करते हैं। अथवा संसद में विपक्ष को उत्तर देते हुए हकलाया करते है।"

फिर कुछ देर मौन रह कर बोला, "तो क्या मतलब है तुम्हारा। आप मजाक उड़ा रहे हो हमारा।" कनछेदी को क्रोध आने लगा। पर अपने गुस्से पर काबू पाते हुए बोला,"एक तरफ कह रहे हो कि प्रधान मंत्री सत्य कह रहे हैं दूसरी तरफ कह रहे हो कि देश रोयेगा। अरे कोई विकास होने पर रोता है क्या? दिन अच्छे आने वाले हों तो कोई मौका खोता है क्या? देश के अच्छे दिन आते हैं तभी तो हम जैसों का घर भरता है। जब घर भरता है तो भला क्या कोई भ्रष्टाचार करने से डरता है। आप तो हमें डरा रहे हैं और पी.एम. को ठीक भी बता रहे हैं।"

"अच्छा तो बताओ कि पी.एम. ने क्या कहा है? यही न कि जी.डी.पी. में बढ़ोतरी होगी। मैं भी मानता हूँ कि होगी। ‘जी’ से उनका अभिप्राय गोल्ड से है तो उसके दाम आज भी आसमान को छू रहे हैं तो वे निरन्तर छूते ही रहेंगे। ‘डी’ वाला डालर भी नीचे न आ कर ऊपर ही जायेगा और अपने बेचारे रुपए को निरन्तर रुलायेगा। रुपया भी डालर के प्रेम में फंसा नीचे गिरता ही जायेगा। ‘पी’ से पेट्रोल की हालत तुम जानते ही हो उसके विषय में तो स्वयं रामचन्द्र जी कह गए सिया से ऐसा कलयुग आयेगा, नकद खरीद कर कार ग्राहक पेट्रोल उधार डलवायेगा। वह उधार भी न जाने कितनी किश्तों में उसका बेटा चुकायेगा।"

"अगर देश की अर्थव्यवस्था का पतनाला वहीं गिरेगा तो फिर आप मुझे बधाई और शुभकामनाएँ किस लिए दे रहे थे।" कनछेदी ने पूछा।

"मेरी तो यही कामना है कि ईश्वर करे तुम्हारी प्रसन्नता पेट्रोल के दामों की तरह से बढ़ती ही जाये। इतना ही नहीं आपके दुःख दर्द और तकलीफ रुपए के मूल्य की भाँति घटती ही जाये। मेरी कामना है कि तुम्हारे दिल में खुशियाँ सरकारी भ्रष्टाचार की तरह भरती ही जाये। और तुम्हारी उमर आतंकवादी गतिविधियों की तरह बढ़ती ही जाये।"

"आप मुझे शुभकामनाएँ दे रहें हैं या बद्दुआ, आखिर आपको आज हुआ है क्या। कभी तो हमारी नीयत को ठीक से तौलो और दो बोल प्रशंसा के भी बोलो।"

"तो ठीक है कनछेदी! प्रधान मंत्री की इस बात के लिए तारीफ की जाने चाहिए कि उन्होंने शराब पी कर गाड़ी चलाने वालों पर रोक लगाने का नायाब नुस्खा आजमाया है, और पेट्रोल तथा शराब की बोतल का दाम बराबर करवाया है। अब कोई साधारण आदमी एक ही समय में या तो पेट्रोल ही खरीद सकेगा या फिर शराब। दोनों को एक दूसरे से दूर रखने का यह तरीका वास्तव में है लाजवाब। प्रधान मंत्री ने लोगों को इस बात के चुनाव की पूरी स्वतंत्रता दी है कि या तो गाड़ी में पेट्रोल डलवा कर घूम लो अथवा शराब पी कर झूम लो। जल्दी ही लोगों को यह समझाया जायेगा कि कार मत चलाओ, उसके बदले शराब पी कर घर में ही मस्ती मनाओ। सड़कों पर दुर्घटनाओं में कमी आयेगी, पार्किंग की समस्या भी लोगों को नहीं सतायेगी। फिर महंगाई क्या खा के उनको सतायेगी।"

"आपको लगता है कि यह नुस्खा काम कर जायेगा, हमें चनावों में कुछ अधिक वोट दिलवायेगा।"

"मैं तो कहता हूँ कि उनकी नीतियों से समाज में बहुत जल्दी परिवर्तन आयेगा और आज का युवक दहेज में कार लेने तक से भी घबरायेगा। वह अपने ससुराल वालों से कहेगा कि कृपया कार दहेज में मत देना क्योंकि मैं आपकी बेटी और कार दोनों का खर्चा एक साथ नहीं उठा सकूँगा। घर गृहस्थी और कार दोनों को साथ साथ नहीं चला सकूँगा।"

"आप हमारे प्रधान मंत्री के सपनों को दिन में ही तोड़ रहे हो, उनकी आर्थिक विकास की गाड़ी को सामाजिक सुधारों की तरफ मोड़ रहे हो। समाजिक सुधार तो हमारे टी. वी. सीरियल लगातार कर रहे हैं इसकी तरफ ध्यान देने की किसी को नहीं जरूरत नहीं है। यदि कुछ करना हो तो मंहगाई बढ़ाने की कोई योजना बनाइये और इसके माध्यम से कैसे अर्थव्यवस्था का विस्तार होगा उसका रास्ता सुझाइए।"

"ठीक है मैं मनरेगा जैसा विकास का कोई सस्ता मार्ग बनाता हूँ, उस पर फरारी कैसे सरपट दौड़ेगी ऐसा उपाय बताता हूँ।"

"समझ गया। उस फरारी में पेट्रोल के लिए बहुत सा धन देना पड़ेगा। अब पेट्रोल खरीदना एक ‘हाई वेल्यू ट्रांजेक्शन’ होगी इसलिए एक नया पैन कार्ड बनवाने के लिए जाता हूँ।"


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