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ISSN 2292-9754

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05.25.2016


अब यहाँ देखिये या वहाँ देखिये

अब यहाँ देखिये या वहाँ देखिये
उसके जल्वों के रौशन निशां देखिये

बन कर नशतर ये दिल में उतर जायेंगे
तीर तीख़ी नज़र औ कमां देखिये

क़ैद ख़ुद को किया आईने में कि अब
रोज़ बढ़ता ही जाये गुमां देखिये

अब ये ख़ुद ही करेंगे बयां दास्तां
जो ये बिखरे लहू के निशां देखिये

बदला-बदला हुआ रुख़ जज़्बात का
दिल के दरिया का आबे रवां देखिये

है ये मुमकिन कि हो अब रिहाई अभी
आप मुंसिफ़ का ताज़ा बयां देखिये

आप को मेरी साँसे हैं यकसर अगर
जान में "मीत" की अपनी जां देखिये।


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