अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
09.26.2017


जब आँखों से आ रहा था प्यार

जब आँखों से आ रहा था प्यार
तो आने क्यों नहीं दिया,
जब पैरों से चल रहा था प्यार
तो चलने क्यों नहीं दिया,
जब मन में झूम रहा था प्यार
तो नाचने क्यों नहीं दिया,
जब हाथों से निकल रहा था प्यार
तो बढ़ने क्यों नहीं दिया,
जब गीतों में आ रहा था प्यार
तो गाने क्यों नहीं दिया,
जब देश के लिये उठ रहा था प्यार
तो फहरने क्यों नहीं दिया,
जब आँखों से आ रहा था प्यार
तो कह क्यों नहीं दिया?


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें