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ISSN 2292-9754

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06.01.2016


आपको मैं मना नहीं सकता

आपको मैं मना नहीं सकता
चीरकर दिल दिखा नहीं सकता

इतना पानी है मेरी आँखों में
बादलों में समा नहीं सकता

तू फ़रिश्ता है दिल से कहता हूँ
कोई तुझसा मैं ला नहीं सकता

हर तरफ़ एक शोर मचता है
सामने सबके आ नहीं सकता

कितनी ही शौहरत मिले लेकिन
क़र्ज़ माँ का चुका नहीं सकता


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