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ISSN 2292-9754

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01.29.2016


"आपने क्या कभी ख़याल किया"

"आपने क्या कभी ख़याल किया"
रोज़ मुझसे नया सवाल किया

ज़िन्दगी आपकी बदौलत थी
आपने कब मिरा ख़याल किया

राज़े-दिल कह न पाए हम लेकिन
दिल ने इसका बहुत मलाल किया

ज़ोर ग़ैरों पे जब चला न कोई
आपने मुझको ही हलाल किया

है "महावीर" शेर ख़ूब तिरे
लोग कहते हैं क्या कमाल किया


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