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ISSN 2292-9754

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11.29.2018


नंद की वेदना

काहे अक्रूर मोहे सत्य बतायो,
बीच भंवर काहे नाव गिरायो,
काहे कर दिया दिन को रतिया,
कैसे मानूँ तोरी बतिया,
कान्हा दाऊ मेरे नयना,
छीन मोसे तोहे आए ना चैना,
नंद का लाल सब गोकुल जाने,
कान्हा को सब मेरा माने,
कैसे यशोदा यह दुख झेले,
मैं ना बताऊँ चाहे प्राण ही लेले,
आज विधाता की एक ना मानूँ,
सत्य असत्य का भेद ना जानूँ,
ओह अक्रूर तुम आप ही पधारो,
पुनः मेरी बात विचारो,
कान्हा गोकुल का रखवाला,
मेरी यशोदा का नंदलाला।


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