ऐसे तुम मुझको बेरुख़ी से सताया न करो कुसुम सिन्हा
ऐसे तुम मुझको बेरुख़ी से सताया न करो बेवफ़ा कहके मुझे ऐसे रुलाया न करो जब से बिछडे हो अश्क़ गिराती हैं मेरी आँखें बर्बाद करके मुझको मुस्कुराया न करो काँटों भरी हैं राहें और गहरी तन्हाई है हँस हँस के मेरे को और बढ़या न करो ज़िन्दगी की राह में कुछ और भी ग़म हैं इक ख़ुशी थी प्यार की उसको घटाया न करो नाम लिख कर मेरा किसी ख़त में अपने बेदर्दी से तुम उसको मिटाया न करो