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05.17.2009
 

ऐसे तुम मुझको बेरुख़ी से सताया न करो
कुसुम सिन्हा


ऐसे तुम मुझको बेरुख़ी से सताया न करो
बेवफ़ा कहके मुझे ऐसे रुलाया न करो

जब से बिछडे हो अश्क़ गिराती हैं मेरी आँखें
बर्बाद करके मुझको मुस्कुराया न करो

काँटों भरी हैं राहें और गहरी तन्हाई है
हँस हँस के मेरे को और बढ़या न करो

ज़िन्दगी की राह में कुछ और भी ग़म हैं
इक ख़ुशी थी प्यार की उसको घटाया न करो

नाम लिख कर मेरा किसी ख़त में अपने
बेदर्दी से तुम उसको मिटाया न करो


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