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ISSN 2292-9754

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01.23.2019


युवा कविताएँ

युवा कविताएँ उतार रही हैं कपड़े
उन हिस्सों के भी
जिन्हें ढकने की कोशिश
में त्रावणकोर की महिलाओं ने
कटा दिये थे अपने स्तन

वो सुना रही है कहानी
उन पाँच दिनों की
ये शायद टोटका है उनका
पुरस्कारों के वशीकरण का

कुछ कविताएँ जो
चाहती है ज़्यादा कुछ
उन्होंने स्त्री पुरुष के मिलन का
करा के पेटेंट कुछ भौंडे शब्दों
के साथ खेलना शुरू कर दिया है

आ गये हैं विदूषक
उछाल रहे हैं पुरस्कार
ले रहे हैं खेल का मज़ा
दे रहे हैं आमंत्रण पुरस्कारों के साथ

उन्हें पता है ये कविताएँ
अपने दिक् काल में हैं
वो जानते हैं इनको
मरोड़ा, खींचा,और सिकोड़ा
कैसे जा सकता है

युवा कविताएँ हो कर ख़ुश
अपनी टाँगों के आस पास के क्षेत्र में
लगाती हैं गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत
लेकिन वो ये भूल जाती हैं वस्तुत:
गुरुत्वाकर्षण जड़ता का एक भाग मात्र है।

दिक् संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ है ईद-गिर्द की जगह ,अंग्रेजी में इसे 'स्पेस' कहते हैं


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