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ISSN 2292-9754

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01.23.2019


क्रांति के आयाम

तेंदू पत्ता तुड़ान करते हुए एक दिन
मेरे ही धधकती जवानी से
ठेकेदार ने जब बीड़ी सुलगा ली तो
मैं नहीं बची
गुम हो मिल गई
दंडकारण्य की गुमनाम कहानियों में

लेकिन कहते हैं न
कुछ बचा रह जाता है
सो बची रही
नख भर उम्मीद नख भर ताक़त

उसी से ले हाथ में बग़ावत की विरासत
गाँधी के न्यासिता के सिद्धांत को नकारा
लैण्ड माईन बिछाई लाल विचारों की
और कर दी घोषणा क्रांति की

उखाड़ फेंका सत्ता, पुलिस, सेना को
हो कर ख़ुश हवा में उठाया हाथ
मुट्ठी बंद की और ज़ोर से चिल्लाई
लाल सलाम

मैं आज़ाद थी
वर्ष बीते, बीते आज़ादी के ढंग
देख रही हूँ हर तरफ़
सिद्धांत परिभ्रमण का

लोमड़ी जिसे मिली थी आज़ादी
बन के वो शेर शासक कहला रही है
अधोवस्त्र फेंक बीड़ी सुलगा रही है

मैं क्रांति की बात करने वाली
ख़ुराक बन सत्ता की
कब की शेरों के गले उतर चुकी हूँ

मार्क्स तैयार है वर्ग संघर्ष के लिए
सलामी दे
हवा में हाथ लाल सलाम


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