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ISSN 2292-9754

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12.02.2014


कई ख़ुदा मुझको यहाँ तक लाए हैं

कई ख़ुदा मुझको यहाँ तक लाए हैं
कई ख़ुदा आजमाय और ठुकराए हैं

कितनों ने की है मेरी तारीफ़ और
मैंने कितनों के क़सीदे गाये हैं

ख़ुदा तूने मुझको जब धोखा दिया
मैंने कई लोगों से धोखे खाए हैं

मैं अलग बिलकुल यहाँ रह गया हूँ
मैंने कितने ही अज़ीज़ आज़माए हैं

किनारा दिखता नहीं है सामने
हर कदम पर जबकि साहिल आये हैं

घर मेरा खाली नहीं हो रहा है
ग़ैरों ने कोने कई हथियाए हैं

तन्हा मुझको भटकना है ज़िंदगी
साथ कितने ठिकानों के साये हैं


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