अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
11.05.2017


बेचैनी

खुशनुमा से चार पल रहेंगे
ज़िंदा यादों में,
बदलता रहेगा वक़्त
इन सुहानी वादियों में,
भीगे जिस्म और
भीगे होठों की कसक नहीं बदलेगी,
तेरे शब्दों का साया
साथ नहीं छोड़ेगा,
तू है या नहीं
दिल पूछता रहेगा,
दिल…
अपनी भागती धड़कनों से
मीठी-मीठी ग़लतियाँ दोहराएगा,
उबलती साँसों में
गरम लम्हों के –
एहसास सुलगाएगा,
तेरी रूह की मदहोशी में
बह कर भी ना किनारा आएगा।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें