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ISSN 2292-9754

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12.13.2018


नीली तितली : समीक्षा

समीक्ष्य पुस्तक : नीली तितली (कहानी संग्रह)
लेखक : भावना सक्सैना
विधा : कथा
पृष्ठ : 101
मूल्य : 200 रुपये,
।SBN : 978-93-83894-55-0
प्रथम संस्करण : 2018
प्रकाशक : हिन्दी बुक सेंटर
4/5बी आसिफ अली रोड नई दिल्ली -110002

साहित्य के विशाल महासागर में अनगिन रत्न--राशियाँ हैं पर जब एक सच्चे रचनाकार की अनुभूतियों की सीपियों के मुख खुलते हैं तो बाहर आता है मोती जैसा सुन्दर सृजन और जगमगा देता है आपके मन को और आसपास के परिवेश को... बस! ऐसे ही कुछ मोती के दाने हैं। भावना सक्सैना जी के प्रथम कहानी संग्रह "नीली तितली” की हर एक कहानी!

इस संग्रह की अधिकतर कहानियाँ अतीत के परिदृश्य को वर्तमान से जोड़ती हैं। समसामयिक संदर्भ के विषय को उठाती तो हैं ही, साथ ही समीकरण भी तलाश कर देती हैं और यही बात दिल को सुकून से भर देती है। इन कहानियों में अगर कहीं नारी की पीड़ा है तो उस पीड़ा की बेड़ियों से निकलने का उन्मुक्त मार्ग भी साथ ही है, कहीं किसी बुज़ुर्ग की उपेक्षा है तो उसकी छाया में नव जीवन की उजली अपेक्षा भी। कहीं अपने देश से विछोह का दुख है तो दूसरी ओर उसको गौरवान्वित करती संस्कृति का मन में सुखद आरोह भी। कहीं मनुष्य के जीवन के समय के अनुसार बदलती नीतियाँ तो कहीं.. कभी न बदलने वाली रीतियाँ, सभी कुछ है नीली तितली के भीतर।

भावना जी कहानी को लिखती नहीं बल्कि जीती हैं। "एक उधार बाकी है" एक ऐसी ही अनबँधे मानवीय रिश्ते की भावपूर्ण कहानी है। जिसमें डच मूल के एक व्यक्ति जोस का मानवीय रिश्ता "मैजिक" की तरह काम करता है। एक लड़की ग्रेस की बीमार माँ के लिए प्राणवायु बन जाता है! पर ग्रेस, माँ के इस संसार से जाने के बाद अपनी नौकरी की व्यस्तता के बदले में उनकी उतनी देख-रेख नहीं कर पाती और वो जोस की मृत्यु के बाद इसी अनदेखी का प्रायश्चित करती है, उस देव रूपी इंसान की कब्र पर रोज़ भाव पुष्प चढ़ाकर!

लेखिका चाहे अपने भारत में हो या फिर सूरीनाम जैसे देश में, इक निर्बाध झरना झरता है अपने देश के प्रति प्रेम का! अपने देश की भाषा, रीति-रिवाज़, रिश्ते-नाते और त्योहारों के प्रति विशेष प्रेम उनकी रग-रग में बसता है। सूरीनाम में रहकर भी वो कण-कण में अपने भारत की माटी को तलाश ही लेती हैं। एप्लीक्स, जिया झूमें तब सावन है, "बरामदा", "आशा", संकल्प, तिलिस्म जैसी कहानियों में देश-प्रेम की अनुपम शीतल धारा आपको भीतर तक ताज़ा कर देती है।

लेखिका लिंडसी के माध्यम से- अपने देश की प्रशंसा करती हैं, "आज जब सारा विश्व भारत को देख रहा है, भारत की संस्कृति को गुन रहा है... क्यों आरिफ जैसे नौजवान पश्चिम की ओर रुख कर रहे हैं?"

भावना जी की कहानियों में समकालीनबोध से जुड़ी संवेदनात्मक लय भी है। बहुत ही सुन्दरता साथ इसी लय को "तिलिस्म" कहानी में उतारा है। ये कहानी अपने देश के लिए एक भारतीय युवा-विश्वास जिसे भावी सपनों का आकर्षण अमेरिका तो ले आया पर ये तिलिस्म उसे अपनी माँ, भाई-बहन, बचपन के मीत... सभी से दूर कर देता है और जब वह लौटता है तो माँ को हमेशा के लिए खो चुका होता है और जो बाक़ी बचा था.... सब कुछ बदल जाता है। अपने देश से विछोह की तड़प उसका कलेजा हमेशा कुरेदती है पर एक जागरूक जिजीविषा उसे सदा गतिमान भी रखती है इसी कारण निराश होकर भी यह युवा हतोत्साहित नहीं होता।

आज के बदलते जीवन में नारी पुरुष के सम्बन्धों में दरार पड़ना एक मार्मिक सत्य है। पुरुष का नारी के प्रेम को न समझ पाना "खुले सिरों के जोड़" तथा "एप्लिक्स" में बड़ी संवेदनशीलता के साथ दर्शाया गया है। "खुले सिरों के जोड़" में समर जैसे प्रतिष्ठित चित्रकार का शादी के बाद भी दूसरी स्त्री के साथ सम्बन्ध बनाना आज की बदलती युवा सोच का एक अत्यन्त दुखदायी कड़वा सच है।

"एक और बोधि" में संध्या का करन के प्रति निश्छल प्रेम और फिर उसी प्रेम का करन द्वारा छले जाने पर बच्चों की ख़ातिर त्याग में बदल जाना भी तो औरत के दायित्व बोध का सबल चित्रण है।

उनकी कहानी के किरदार चाहे लिंडसी, काम्या या फिर तन्वंगी हो, वे पीड़ा से भागते नहीं क्योंकि "घावों की प्रदर्शनी तो कमज़ोरों का काम है"(बरामदा)।

दुनिया आपके घाव पर "मरहम नहीं लगाती, उन्हें कुरेदती है, तब तक जब तक सारा लहू बहकर आपको गतिहीन न कर दे" (उसका पत्र)।

प्रेम में दर्द पाने से अब पुरुष भी अछूता नहीं ऐसे ही भाव लिए संस्कारों में बँधे दो युवा मन की अपूर्ण मूक प्रेम कहानी है- "तेरी मेरी कहानी"।

कहानी "आशा" एक अलग ही प्रेम की रवानगी समेटे है। लेखिका का मायके के प्रति प्रेम, पड़ोस की चाची से भावनात्मक सम्बन्ध मन को छू जाता है, भरे-भरे हाथ चूड़ियाँ पहनने वाली आशा चाची भरी जवानी में ही अपने पति को खो देती हैं। निःसंतान चाची को मजबूरी में नौकरी करनी पड़ती है पर समाज की विकृत सोच सन्देह के चलते उससे मुख मोड़ लेती है। पर लेखिका उसके पवित्र प्रेम के आगे तब नमित हो जाती है जब वह देखती है कि मृत्यु शैया पर पड़े हुए चाची को उस गुलाब के पौधे की चिन्ता है जो उसके पति ने लगाया था....! वो गुलाब को सूखने नहीं देती बिल्कुल अपने प्रेम की तरह! कहानी का अंत असीम और महीन प्रेम की भावनाओं के झरने सा फूट कर पाठक के नयनों में समा जाता है। भावना जी की कहानियों में सुन्दर कथ्य और कोमल भाव का मेल है।

जो कहानियाँ समाज कल्याण की ओर ले जाएँ वही सही मायने में कहानी की आत्मा को स्पर्श करती हैं"। "दूरी" और "जीवन रेखा" कुछ इसी तरह की मर्मस्पर्शी शैली में लिखे सन्देश हैं।

एक बहुत नाज़ुक सा विषय हमारे देश में सदियों से त्रास देता आ रहा है वह है... लिंग-भेद, ऐसी मलिन सोच लिए माँ के स्नेह को तरसती एक लड़की की कहानी है "दूरी" जिसने पाठक मर्मान्तक पीड़ा और दर्द में जी रही बेटियों के प्रति जागरूक करवाया है। सजल आँखों से भरी बेटी की चाह है कि माँ कभी तो स्नेह बरसा दे उस पर "माँ रूपी लवण की उसके अश्रु द्रव्य से मिलने पर कभी अनुकूल प्रतिक्रिया क्यों नहीं हो पाती"। संवेदनात्मक शैली में इस कहानी का अन्त आत्मबोध कराता है उन माताओं को जो बेटियों की परवरिश को भावनात्मक स्तर पर न्याय नहीं दे पातीं!

एक सन्देश "जीवन रेखा" में भी निहित है। एक सरकारी नौकरी में उच्च पद से सेवानिवृत व्यक्ति जो अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए बहुत कुछ करना चाहता है पर उसका परिवार ही उससे विश्वासघात कर देता है पर तब भी वो टूटता नहीं बल्कि और मज़बूत होकर अपने काम को अंजाम देने में जुट जाता है। हर वर्ग की सोच को नई दिशा देती है ये कहानी!

लेखिका का सूरीनाम में बसे लोगों के प्रति प्रेम लगभग हर कहानी में किसी न किसी रूप में प्रकट हुआ है। उन्होंने एक लम्बा समय सूरीनाम में बिताया है। वहाँ बसे भारतीयों के अनुभवों को समेट कर "कुछ कतरे कंत्राक के" में बड़ी आत्मीयता के साथ उतारा है। वहाँ अपनी प्यारी भाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए भी बहुत परिश्रम किया है उन्होंने। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग में कार्यरत लेखिका एक कोमल हृदय की कवयित्री भी है। एक उजली ऊर्जा इनकी सहचरी है! शायद इसी कारण वो सूरीनाम में बसे कई हिंदुस्तानी भाई-बहनों की भारत-विछोह की पीड़ा से हमें परिचित करवाने में सफल रहीं! सूरीनाम उनके मन में समाहित है तभी तो सूरीनाम ब्लॉमन्सस्टीन झील के किनारे स्थित ब्रोंज़बर्ग नेशनल पार्क की नीली तितली को सँजों कर वो अपने साथ भारत ले आई। उनके अनुसार - "ख़ुशी एक नीली तितली है जो छोटे-छोटे लम्हों में आ बसती है। यदि उस पल हाथ बढ़ा उसे आश्रय न दो तो वह फिर से जीवन के जंगल में खो जाती है"।

इस अमूल्य नीली तितली को आप भी अपने हृदय में सहेज लीजिये! ये नायाब नीली तितली साहित्य के आकाश में ऊँची उड़ान भरे, यही शुभ कामना है मेरी!


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