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ISSN 2292-9754

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09.27.2017


ज़िन्दगी एक कविता

ज़िन्दगी एक कविता है
जिसे मैं लिख रही हूँ
कुछ पन्ने स्याही से लिपटे
कुछ बिल्कुल कोरे हैं
पर मैं लिख रही हूँ
हर रोज़ एक नया शब्द
पन्ने पर जोड़ रही हूँ
आश्चर्य होता है कभी कभी
उलझन में रहती रोज़ ही
जीवन का हिस्सा है जो
कोरे काग़ज़ पर लिखना है
कभी ख़ुशी ज़ाहिर करती
कभी रोकर दर्द लिखती
कभी गुनगुनाती कभी रूठती
रोज़ ही नयापन लिये जीती
मैं भावनाओं को बुन रही हूँ
ढूँढ़ रही हूँ मैं आज भी
इधर उधर भटक जाती हूँ
सपनों को शब्दों में पिरोने हेतु
मैं रोज़ कुछ लिख रही हूँ!


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