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ISSN 2292-9754

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09.27.2017


कब आयेगा मेरे हिस्से इतवार

मैं बीमार हूँ
लेकिन
मैं किसी से कह नहीं सकती
कि मैं बीमार हूँ
शरीर थकावट से चूर है
सुकून बहुत दूर है
लेकिन मैं कह नहीं सकती
आज आराम की ज़रूरत है
खड़े होना भी दूभर है
हाथों में सूजन है
लेकिन मैं कह नहीं सकती
आज काम नहीं होगा मुझसे
आज तो इतवार है
छुट्टी का दिन
आराम का दिन
कोई दस बजे उठेगा
कोई बारह बजे
लेकिन मैं रोज़ की तरह आज भी
सुबह पाँच बजे उठी
सिर में दर्द, कमर में दर्द
लेकिन मैं किसी से कह नहीं सकती
आज मैं दस बजे तक उठूँगी
फ़रइशें कल रात ही बता दी सबने
मैं ये खाऊँगा, मैं वो
किसी ने पूछा ही नहीं
मैं क्या खाऊँगी?
लेकिन मैं कह नहीं सकती
मैं आज ये खाना बनाऊँगी
सबके हिस्से का इतवार आ गया
मेरे हिस्से का कब आयेगा?


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