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02.26.2014
 

चाहे जिससे भी वास्ता रखना
हस्तीमल ’हस्ती’


चाहे जिससे भी वास्ता रखना
चल सको उतना फ़ासला रखना

चाहे जितनी सजाओ तस्वीरें
आईने के लिये जगह रखना

घर बडा़ हो कोई ज़रूरी नहीं
ये ज़रूरी है दिल बडा़ रखना

वक़्त दस्तक नहीं दिया करता
अपना दरवाजा़ तुम खुला रखना

अपने घर को सजाओ अपनी तरह
खु़द से पूछो कहाँ पे क्या रखना

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