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ISSN 2292-9754

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11.27.2014


हमारी पार्टी ही देश को बचायेगी

चुनाव सिर पर था। जो युवक चर्चा के लिए चपेट में आ जाता उसे ही वे पकड़कर अपनी भावी नीतियाँ समझाकर अपने दल को वोट देने के लिए आग्रह करने लगते। हर बार दावे के साथ वह एक ही बात कहते केवल हमारी पार्टी ही देश को बचा सकती है।

सत्ताधारी दल के वरिष्ठ सदस्य, अधिकारपूर्वक प्रवक्ता बन कर कह रहे थे, "यदि चुनाव हार गए तो उन्हें कुर्सियाँ छोड़ना पड़ेंगी, और वैसी स्थिति में देश का बर्बाद होना सुनिश्चित है। विगत कई दशकों तक लगातार शासन करने का जो कष्ट जो उन्होंने किया है उसीके परिणामस्वरूप राष्ट्र को दुनिया के महानतम देशों की कतार में लाकर खड़ा किया है।"

छ रुककर वह बोले, "प्रतिपक्ष तो देश को गड्ढे में धकेलने पर तुला हुआ बैठा ही है, यदि उसके इरादे सफल हो गए तो बाद में हमारे लिए देश को उबार पाना बहुत कठिन हो जाएगा।"

सत्रह वर्षीय युवक ने पूछा – "आपने किस तरह देश को महान बनाया है, कुछ प्रकाश डालेंगे?"

वे बोले आज शाम को दूरदर्शन पर हमारे सत्तधारी दल के मंत्रियों की चर्चा सुन लेना, आपको विश्वास हो जाएगा कि देश सचमुच महान हो चुका है। देखिये, हॉकी और क्रिकेट के प्रभारी मंत्रियों ने टीमों के जीतने का श्रेय प्रधानमंत्री को दिया है या नहीं?, क्योंकि टीम के कप्तानों ने अपने-अपने मंत्रियों को दिया था। ऐसी निस्वार्थ भावना ही देश को महान बना सकती है।"

मतदाता बोला- "बेचारे मंत्रियों को राजनीति के खेलों से बाहर जाकर कुछ और खेलने की खेलने की फुर्सत मिले तो और खेल खेलें। हॉकी और क्रिकेट के मैदानों को भी राजनीति के खेल का मैदान ही बनाया। अतः झूठे श्रेयों का बोझ अपने सिर पर क्यों ढोते? इसीलिए अपने से मोटी चमड़ी पर ट्रांसफर कर दिया। खिलाड़ी तो ऊँचे रहे, तरह तरह के खेलों को आगे बढ़ाने में इन महान लोगों का योगदान भी निर्विवाद है, शायद तभी देश इतना ऊंचा उठा है?"

सत्ताधारी दल के प्रतिनिधि एक बिंदु और बताया – "हमारी सुगठित पारिवारिक व्यवस्था ने भी देश को महान बनाया है।"

"इसका अर्थ है आपके परिवार की बहुत मज़बूत पारिवारिक व्यवस्था है?" उसी युवक ने उनकी ओर अंगुली उठाते हुए प्रश्न किया।

"मैं तो तलाक शुदा हूँ, फिर भी दो परिवारों का खर्च चला रहा हूँ, देख लीजिए भारत में हम एक साथ दो दो परिवारों का खर्च वहन कर सकते हैं? अमेरिका में ऐसा कभी नहीं होता। वहाँ तो पति-पत्नी तक अलग-अलग अपने खर्च उठाते हैं। यह कदम भी देश को महानता ही प्रदान करता है।"

"आप दो परिवारों का खर्च क्यों वहन कर रहे हैं?"

"क्योंकि कोर्ट ने आदेश दिया था"- सत्तासीन बोले।

"इसका मतलब हमारी अदालतें सबके प्रति न्याय करती हैं," प्रश्नकर्ता ने पूछा।

 भी नहीं है, दूसरी पार्टी का पक्ष लिया गया था, मेरे प्रति तो अन्याय हुआ था," प्रतिनिधि ने उत्तर दिया।

"इस देश की महानता ही यह है आप कितने भी अमीर या गरीब हों, ऊपर की अदालत में अपील कर सकते हैं। आपने अच्छे वकील को करने में देर की होगी? " प्रश्नकर्ता ने पूछा।

"व्यक्तिगत समस्याओं को भूल जाइये, भारतवर्ष महान देश है क्योंकि यह हिन्दुओं के बाहुल्य वाला देश है।"

"किन्तु मैं हिन्दू नहीं हूँ, मुस्लिम हूँ?" प्रश्नकर्ता बोला।

"तब तो देश का महान होना निर्विवाद है क्योंकि यहाँ सभी धर्म समान सम्मान पाते हैं।"

"मेरा विश्वास सभी धर्मों में समान नहीं है, मैं मुस्लिम धर्म को महान मानता हूँ," प्रश्नकर्ता ने अपना विचार प्रकट किया।

"यही तो मैं कह रहा हूँ, आप सभी अपने-अपने धर्मों को महान मानते रहिए। आप स्कूल में हों अस्पताल में या मंदिर मस्जिद में। स्वयं को आप सब महान मानते हैं, तभी तो देश महान बना है?"

"और किन किन क्षेत्रों में आपने देश को महानता दी? "उत्सुक युवा ने पूछा।

"इस बात के लिए भी भारत महान है कि आप गंदे से गंदा साहित्य पढ़ सकते हैं, ब्लू फिल्में देख सकते हैं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का लाभ लेते हुए उन पर परिचर्चा कर सकते, उनका गहराई से विश्लेषण कर सकते हैं, कोई रोक टोक नहीं। सरकार स्वाधीनता का लाभ प्रत्येक व्यक्ति को देना चाहती है।"

"देश को महान बनाने के लिए प्रधानमंत्री का अनुभवी और योग्य होना आवश्यक है या नहीं, इस पर आपके क्या विचार हैं?" मतदाता ने पूछा।

"वंशानुगत अनुभव को ध्यान में रखते हुए हम बार-बार एक ही परिवार से प्रधानमंत्री को लाते हैं। वैश्विक स्तर पर संबंध और पुराने अनुभव सार्थक सिद्ध होते हैं। बीच-बीच में परिवर्तन के लिए कुछ-कुछ दिन के लिए बागडोर किसी और के हाथ में दे देते हैं, फिर वापिस ले लेते हैं।"

"यही तो समूचे राष्ट्र के लिए प्रेरणा का विषय है। यह भी देश को महान बना रहा है। इसी तरह के वंशानुगत अनुभवों का लाभ लेकर सभी मुख्यमंत्री अपने अपने बेटों को राजतिलक कराने की कवायद में जुटे हैं। प्रधानमंत्री के वंश वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के वंश वाले मुख्यमंत्री, सत्ता की इससे अच्छी बंदरबाट और क्या हो सकती है? देश को महान बनाने में आपके द्वारा प्रदत्त इस कला का योगदान महान माना जाएगा," प्रश्नकर्ता ने ही उत्तर दे दिया।

"देखिये हम तो अल्पसंख्यक वर्ग को भी कभी नहीं भूले। जब-जब चुनाव होते हैं हम उन्हें ससम्मान याद करते हैं। उनके लिए कल्याणकारी योजनाएँ भी बनाते हैं," प्रतिनिधि ने कहा।

"देश महान बना या नहीं यह तो ज्ञात नहीं किन्तु चुनाव सिर पर आते ही आपने हम सरीखे अदने से व्यक्ति से चर्चा कर जो महानता प्रदर्शित की है, इस का ही हमें पर्याप्त संतोष है।"

ह कहकर युवक ने अपनी राह पकड़ी। चलते चलते यह भी कहता गया अब आप मुझे बख्शें किसी और को पकड़ें। आपने मेरे साथ समय ही गंवाया है, मैं अभी मतदाता नहीं हूँ।


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