अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
12.12.2014


भारत में यौन क्रांति का सूत्रपात

एक अमरीकी पत्रिका ने लिखा है कि उनके देश में यौन क्रांति का पटाक्षेप हो रहा है। वहाँ के लोग इस क्रांति में अभी तक अतिशय सक्रिय रहे हैं किन्तु अब हाँफ रहे हैं। अब वे भारतीय ग्रंथों से प्रेरणा लेकर योगासनों की ओर आकर्षित हो चुके हैं। यौनासनों से वहाँ विकर्षण होता जा रहा है। अब उन्हें भारतीय पारिवारिक जीवन लुभा रहा है। यौन स्वातंत्र्य से वे ऊब चुके हैं।

कई क्रांतियाँ अमेरिका में जब समाप्त हुईं तब भारत में शुरू हुई हैं। पत्रिका के अनुसार बीसवीं सदी में अमेरिका में जो यौनक्रांति शुरू हुई थी, बीच में धीमी पड़ी और अब इक्कीसवीं शताब्दी में समाप्ति की कगार पर है।

प्रसन्नता की बात यह है कि वह बागडोर अब समर्थ भारतीय हाथों ने थाम ली है। अब भारतीय ऊर्जावान अपने देश में यौनक्रांति करने पर अडिग हैं। किशोर उम्र के बसकर्मियों से लेकर प्रौढ़ वय के पत्रकार अथवा बूढ़े कथावाचक भी पीछे नहीं है, पूरे उत्साह से इसमें भागीदारी कर रहे हैं। इन दिनों यौन क्रांति लोकप्रियता में शीर्ष पर है। प्रेरणा-पुरुषों की भी कोई कमी नहीं, यत्र तत्र सर्वत्र विद्यमान हैं। इसी एकमेव क्रांति के सहस्त्रों सक्रिय सदस्य प्रतिदिन समाचार पत्रों के माध्यम से सुर्खियाँ बने हुए हैं। उनके कार्यकलाप बेहद विचारोत्तेजक और अभूतपूर्व हैं।

जब मैं घर के बाहर चहलकदमी कर रहा था, कुछ लोग मेरा आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आए, "कहने लगे आज रात से इस क्रांति की शुरूआत करने जा रहे हैं, क्या आपका सहयोगी हाथ हमारे सिर पर रहेगा?"

मैंने प्रश्न किया, "आप लोगों ने इतने विलंब से इसकी शुरूआत कैसे की?"

उन्होंने उत्तर दिया - "हम लोग बेसब्री से इक्कीसवीं शताब्दी की प्रतीक्षा कर रहे थे। किसी तथाकथित धर्मप्रेमी पिता-पुत्र की, किसी स्टिंग ऑपरेशन के विशेषज्ञ नामी-गिरामी पत्रकार की अगुवाई में इसका प्रारंभ जोशोख़रोश से करते? देखिये हमारी कल्पनानुसार वह घड़ी आ गई। और हम क्रांति करने को अब उद्यत हैं।"

मैंने कहा - "यदि कोई प्रस्ताव लाये हों तो हस्ताक्षर करने को तैयार हूँ।"

"आप हमारे साथ खड़े रहें इतना ही काफी होगा।"

जब वे क्रांतिकारी चले गए तो मैंने अंदर जाकर श्रीमतीजी को सूचना दी कि इस बात को अभी गुप्त ही रखना किन्तु पिछले दिनों अपने देश में यौन क्रांति की सफल शुरूआत हो चुकी है। उस क्रांति की सफलता के लिए मेरी शुभ कामनाएँ वे चाहते थे।

"लेकिन आप की उम्र तो अधिक हो गई है, यह क्रांति युवा वर्ग के लिए ही ठीक है।"

"किसी भी क्रांति को करने के लिए उम्र कभी आड़े नहीं आती," मैंने नम्रतापूर्वक कहा।

इतना अवश्य हुआ कि जब मैं उठा पत्नी के सामने खिसियाता रहा।

फिर मैंने पूछा – "अपने बच्चों के क्या हाल-चाल हैं?"

पत्नी बोली, "उनके बारे में मैं सतर्क हूँ। मेरा तो प्रयत्न है कि वे निर्द्वन्द्व होकर अपनी सारी इच्छाएँ पूरी कर लें। और उनको यह स्वतंत्रता देने में मैं प्रमुख किरदार निभाऊँगी।

यदि इस क्रांति में संघर्ष करते करते आप नहीं लौट पाये तो?"

"तो स्वर्णजड़ित फ्रेम में मेरा चित्र लटका देना," मैंने कहा।

जब मैं क्रांतकारी सूची में अपना नाम लिखाने बाहर निकला तो जीन्सपैंट और रंगीन शर्ट में एक बहुत बूढ़ा प्रतीक्षारत था, उसने मुझसे पूछा क्या आप भी इस क्रांति में सहयोग करने के इच्छुक हैं?

"हाँ, हाँ, क्यों नहीं, क्यों नहीं, इस यौन क्रांति में मैं भी अपना नाम लिखाना चाहता हूँ।"

वह हँसा और कहने लगा, "इसकी प्रारंभिक दौड़ में ही आप पास न हो सकेंगे।"

मैंने कहा – "बिलकुल गलत 1950 में मैं जितना स्वस्थ था उससे भी अधिक स्वस्थ आज हूँ। चाहें तो परीक्षण कर लें।"

"हमारे पास समय नहीं है, पहले ही हमारे पास बहुत से उम्मीदवार प्रतीक्षारत हैं।"

"अच्छा तो मुझे पीछे की कतार में खड़ा कर दें, अनुभव उम्र से भी अधिक महत्वपूर्ण होता है।"

"क्षमा करें यौनक्रांति 30 वर्ष से अधिक उम्र वाले किसी व्यक्ति पर विश्वास नहीं करती।"

"अच्छा यदि मुझे ब्रिगेड में या किसी रेजीमेंट में सम्मिलित नहीं कर सकते तो मुझे दर्शकों की पहली पंक्ति में ही जाने का अवसर दे दें।"

"आपको सबसे पीछे की कतार में जगह दे सकते हैं जहाँ रहकर आप घायलों और बीमारों की सेवा कर सकें?"

"इसका अर्थ यह हुआ मैं कोई भी सुंदर सीन नहीं देख पाऊँगा।"

अतः मुझे 2014 में सबसे पीछे तीमारदारी करने के लिए बैठा दिया गया। कई युवक-युवतियाँ थकान यौनासनों और पीटने, झिंझोड़े जाने के फलस्वरूप स्ट्रेचर पर लाये जाते रहे।

मैं पहले ही जानता था, यौनक्रांति जब शुरू होती है तो बड़ी आकर्षक लगती है। किन्तु जब उसका अंत होता है तो वह बड़ा दर्दनाक होता है। प्रारंभ में भले ही रोमाँचक लगती हो किन्तु बाद में युवक-युवतियों के मस्तिष्क और शरीर पर जो खरोंचें लगती हैं, उसका दर्द वही समझ सकते हैं। तब उनका मोहभंग होता है।

कुछ समय बाद मैंने मनोचिकित्सक से अपनी जाँच करायी और वहाँ से मुक्त होने का निवेदन किया। मुझे सबसे अच्छे आचरण के लिए एक प्रमाणपत्र दिया गया।

मुझे विश्वास है भारत में भी यह आंदोलन लंबा चलने वाला नहीं है। सेनाएँ बहुत जल्दी थक हारकर बैठ जाएँगी। मुझे तो डर है जिस प्रकार 1971 में पाकिस्तान ने पूरी फौज का आत्मसमर्पण करा दिया था भारतीय सेना भी इस यौन क्रांति में पूरी तरह हथियार न डाल दे?


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें