हरिहर झा

कविता
कीचड़ में कमल
घाव दिये जो गहरे
चम्मच से तोते सीख गये खाना
तुरत छिड़ गया युद्ध
दिल का दर्द
परदुख कातर
मौन मुखर!
वो बहेलिया
साहित्य घटिया लिख दिया
पुस्तक समीक्षा / चर्चा
अपने समय का चित्र उकेरतीं कविताएँ - प्रदीप श्रीवास्तव