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ISSN 2292-9754

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09.28.2017


शिव आराधना

(पञ्चचामर छंद)

भजो सदा अनादि नाम शक्ति रूप वन्दना।
हरो त्रिलोक नाथ क्लेश कष्ट दुःख क्रंदना॥
वृषांक देह नीलकण्ठ शुभ्रता उपासना।
सदा करो कृपा प्रभो करूँ अनंत अर्चना॥

त्रिशूल हाथ रुद्रदेव उग्र रूप क्यों धरे।
नमो नमामि शक्तिनाथ वंदना सदा करें॥
बिसारि भूल भक्त देव पाप ताप हो हरें।
अनंत रौद्र रूप देख दैत्य हैं सभी डरें॥

अनंग सर्वशक्तिमान कंठ सर्प है सजे।
त्रिनेत्र रूप माथ चंद्र गंग धार है धजे॥
त्रिशूल हाथ वामअंग अम्बिकाहिये सजे।
उपासना करे अनाथ भक्त मन्त्र है भजें॥

नमामि नाथ प्रार्थना करें दया प्रभो करो।
प्रकाश पुंज ज्ञान की प्रभो भरो प्रभो भरो॥
उजाड़ बाग ज़िंदगी पड़ा प्रभो सँवारिये।
अथाह वेदना सहें कृपालु शम्भु तारिये॥


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