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ISSN 2292-9754

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09.28.2017


बतलाते गुरु राम को

(कुंडलिया)
बतलाते गुरु राम को, ऋषि गौतम की भूल ,
शिला अहिल्या हो गयी, करो श्राप उन्मूल॥
करो श्राप उन्मूल, कष्ट मेटो सुखहारी,
हो पाषाण सजीव, बने फिर सुंदर नारी॥
हुई राम धुन गूँज, देव नभ पुष्प गिराते ,
शिला बनी पुन नारि, राम महिमा बतलाते॥


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