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06.22.2008
 
खु़द अपना बारे-गम ढोना पड़ेगा
डॉ. फ़रियाद "आज़र"

खु़द अपना बारे-गम ढोना पड़ेगा
मगर हर लम्हा खुश होना पड़ेगा

वो इतना हँस चुका है ज़िन्दगी में
कि शायद उम्र भर रोना पड़ेगा

अगर तुम खु़द को पाना चाहते हो
तो आपने आप को खोना पड़ेगा

वो शायद ख़्वाब में दोबारा आये
मुझे इक बार फिर सोना पड़ेगा

निखर जायेगी फिर सूरत तुम्हारी
मगर अश्कों से मुँह धोना पड़ेगा

पड़ेगा दुश्मनों का साथ देना
ख़िलाफ़ अपने उसे होना पड़ेगा

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