अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.03.2012
 
ज़माने से रिश्ता बनाकर तो देखो
देवी नागरानी


ज़माने से रिश्ता बनाकर तो देखो
समझ बूझ से तुम निभाकर तो देखो

यह पुल प्यार का एक, नफ़रत का दूजा
ये अन्तर दिलों से मिटाकर तो देखो

गिराते हो अपनी नजर से जिन्हें तुम
उन्हें पलकों पर भी बिठाकर तो देखो

उठाना है आसान औरों पे ऊँगली
कभी खुद पे ऊँगली उठाकर तो देखो

न जाने क्या खोकर है पाते यहाँ सब
मिलावट से खुद को बचाकर तो देखो

न घबराओ देवी ग़मों से तुम इतना
जरा इनसे दामन सजाकर तो देखो

अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें