अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.03.2012
 
कसमसाता बदन रहा मेरा
देवी नागरानी


कसमसाता बदन रहा मेरा
चूम दामन गई हवा मेरा

मुझको लूटा है बस खिज़ाओं ने
गुले दिल है हरा भरा मेरा

तन्हा मैं हूँ, तन्हा राहें भी
साथ तन्हाइयों से रहा मेरा

खोई हूँ इस कद्र ज़माने में
पूछती सबसे हूँ पता मेरा

आईना क्यों कुरूप इतना है
देख उसे अक्स डर रहा मेरा

मेरी परछाई मेरे दम से है
साया उसका, कभी बड़ा मेरा

मैं अंधेरों से आ गया बाहर
जब से दिल और घर जला मेरा

जिसने भी दी दुआ मुझे देवी
काम आसान अब हुआ मेरा

अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें