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ISSN 2292-9754

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02.15.2016

 
अब ख़ुशी की हदों के पार हूँ मैं
देवी नागरानी

अब ख़ुशी की हदों के पार हूँ मैं
दर्द पिघला है अश्क़ बार हूँ मैं।

गीत कैसे न सुर में ढल जाते
दोस्तो साज़े दिल का तार हूँ मैं।

जिसने पी है तेरी निगाहों से
जो न उतरे वही खुमार हूँ मैं।

जिनको माँगे बिना मिले आँसू
उन्हीं लोगों में अब शुमार हूँ मैं।

जिससे घायल नहीं हुआ कोई
मोम की एक बस कटार हूँ मैं।

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