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10.25.2007
 
आज का राँझा हीर बेच गया
चाँद शेरी

आज का राँझा हीर बेच गया
हीरे जैसा ज़मीर बेच गया।

इक कबाड़ी को वो निरा जाहिल
मीर तुलसी कबीर बेच गया।

सोने चाँदी के भाव व्यापारी
दे के झाँसा कथीर बेच गया।

इक कबीले की शान रखने को
अपनी बेटी वज़ीर बेच गया।

बाप दादा की उस हवेली को
एक अय्यास अमीर बेच गया।

कह के ’शेरी’ उसे चमत्कारी
कोई पत्थर फ़कीर बेच गया।

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