अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
01.06.2008
 
बैटरी चार्ज करने के लिए दिल उधार माँगू रे।
अविनाश वाचस्पति

वैज्ञानिकों की मानें तो अब दिल सिर्फ दिल ही नहीं, बिजली हाउस के रूप में भी उपयोगी होने वाला है। ये बिजली बनायेगा और करंट भी मारेगा। इस पर मेरे एक मित्र की प्रतिक्रिया थी कि इसमें नई बात क्या है, दिल तो खून को पंप करके जीवन को पहले से ही चार्ज कर रहा है। खून में करंट की शक्ति जीवन में जीने की ताकत का संचार कर रही है। प्रेमी प्रेमिका दिल की ताकत के बलबूते जमाने भर से लड़ जाते हैं।  इसके कारनामों ने न जाने कितने गीगा बाईट का स्पेस कब्जाया हुआ है। दिल तो आखिर दिल है ना ?

आज सबसे अधिक जरूरत मोबाइल चार्जर की होती है और दिल उसी को चार्ज करेगा। अब कार, ट्रेन, जहाज में मोबाइल चार्जर लेकर घूमने के दिल लद गये। लदने वाले हैं वे भी दिन जब चार्जर माँगते मोबाइल फोन धारक सर्वत्र नजर आया करते हैं। आपके पास चार्जर है, बैटरी खत्म हो गई है ?  अब दिल की धड़कन मोबाइल बैटरी को चार्ज करेगी और दिल के मरीजों की पेसमेकर की बैटरी को भी। संभावनायें अभी और भी हैं यानी बैटरी कोई भी हो चार्ज दिल से ही हुआ करेगी।

दिल जो बेकाबू हो जाता था अब बैटरियों को बिजली देकर काबू में रखेगा पर खुद बेकाबू ही रहेगा। अब तो यह सोचना होगा कि किस समय दिल से कौन सी बैटरी चार्ज करना मुफीद रहेगा। इसका टाईम टेबल भी बनाना पड़ सकता है।

जिनके मित्रों में खूबसूरत और जवान हसीनायें होंगी जब उनके दिल से बैटरी चार्ज की जाएगी तो वो ज्यादा अवधि तक चलेगी और बुढ़ापे के दिल से फुलचार्ज बैटरी एक घंटी बजने पर ही खत्म हो जाया करेगी, बात करने का भी मौका नहीं देगी। मित्र को कौन समझाता कि हसीनाएँ तो खूबसूरत और जवान ही होती हैं।

मित्र फुल चार्ज बैटरी की तरह कहे जा रहे थे ज़िंदगी ज़िंदादिली का नाम है, मुरदा दिल क्या ख़ाक जिया करते हैं। मुरदा दिलों से तो बैटरी चार्जिंग में समय भी ज्यादा लगता है। वो चार्जिंग होना दिखाती तो रहती हैं परन्तु सिर्फ दिखाती ही हैं, बैटरी में बिजली भरती नहीं हैं। जाँच करने पर ज़रूर दिल में डिफेक्ट डिटेक्ट हो सकेगा। 

दिल की धड़कनों के कमाल की फेहरिस्त अब और ब्ढ़ने वाली है। कोई अचंभा नहीं कि किसी व्यंग्य के विचार ने दिल को झिंझोडा और दिल हो गया चालू। व्यंग्य तैयार हुआ और मेल भी चली गई। सब आटोमैटिक। अखबार पढ़ते गये, टी.वी. देखते रहे, समाज की समस्याओं पर चिंतन करते रहे और उधर दिल अपने कार्य में जुटा रहा। वो रचनाओं पर रचनायें तैयार कर भेजता रहा। दिल की सैटिंग में अवश्य ही कुछ फेरबदल करके सेव करने होंगे। फार्मेट, फोंट, शब्द सीमा, ले आउट, लैंग्वेज, मेल मर्ज, फीमेल मर्ज वगैरह वगैरह।

दिल से जब करंट का प्रोडक्शन शुरू हो जायेगा। दिल जब बिजली का प्रोडक्शन हाउस बनकर उभरेगा तब युवतियों को छेड़खानी से बचने के लिए जूडो कराटे नहीं सीखना पड़ेगा, यह सब पुराने जमाने की बातें हो जायेंगी और किस्से कहानियों में ही मिला करेंगी। एक दो दशक बाद ही छेड़खानी करते ही बिजली के झटके लगने के किस्से आम हो जायेंगे। असामाजिक छेड़क तत्व पहले वोल्टेज मीटर से वोल्ट चैक करेंगे और देखेंगे कि अगर उनकी झेलक पावर स्ट्रांग होगी तभी छेड़ेंगे नहीं तो झलक से ही गुजारा चलायेंगे। जब दिल धड़क तो रहा होगा परन्तु करंट नहीं बना रहा होगा, वही मौका छेड़ने के लिए अत्युत्तम रहेगा।

आजकल जैसे शाम-रात होते ही शराबी नशे में धुत सड़कों और नालियों के इर्द गिर्द गिरे पड़े दिखाई देते हैं। वैसे ही हसीनाओं को छेड़ने पर करंट खाए हुए लोग इधर उधर लुढ़के दिखाई देंगे। फिर पुलिस को जाँच में पहले यह पता लगाना होगा कि यह सुरा का सताया हुआ है या छेड़ने पर करंट खाया हुआ है। आईपीसी की धाराओं में इजाफ़ा करके इनके लिए अलग से दफ़ाओं की व्यवस्था करनी होगी और कोई अचंभा नहीं पुलिस यह माँग कर बैठे कि दिल पर डिजीटल मीटर लगवाना अनिवार्य होना चाहिए।

दो-पाँच साल बाद का सीन देखिये हाई टैक मजनूँ सर्वत्र यही गाना गुनगुनाते नज़र आ रहे हैं दिल विल प्यार व्यार मैं क्या जानूँ रे, बैटरी चार्ज करने के लिए दिल उधार माँगू रे।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें