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05.26.2007
 
तेरे होने से
अशोक वशिष्ट

तेरे होने से, हर चीज़ की, तस्वीर बदल जाती है,
तेरे होने से, हर चीज़ की, तक़दीर बदल जाती है।

तेरे न होने से सब कुछ, बेमायने लगता है मुझे,
तेरे होने से, हर चीज़ की, तासीर बदल जाती है।

तेरे न होने से, हर लम्हा-लम्हा, डसता है मुझे,
तेरे होने से, हर लम्हे की, तदबीर बदल जाती है।

तेरे न होने से, सूली पे, लटकता है बदन,
तेरे होने से, हर पाप की, ताज़ीर बदल जाती है।

तेरे न होने से,  तन्हा हूँ,  बहुत तन्हा हूँ,
तेरे होने से, तन्हाई की, तकदीर बदल जाती है।


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