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ISSN 2292-9754

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10.15.2014


ईर्ष्या

उसने
अपने पर्स से
निकाल दी है,
मेरी तस्वीर
और
रसोई-घर में
लगा दिये हैं
ताले!

जिस दिन से,
मैंने उसे कहा है -
"मत किया करो,
इतना शृंगार,
कि देखकर तुम्हारी
खूबसूरती,
'किचन' में
जलने लगें रोटियाँ!"


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