अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

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11.12.2017


त्रासदी विवाहित इश्क़िए की

  सावन भादों में बीके की बीवी मायके गई तो वह बल्लियाँ उछलने लगा। उसे लगा कि अब उसके मज़े ही मज़े हैं। अब उसे प्रेमिका से मिलने जाने से कोई नहीं रोक सकता। भगवान भी नहीं। भर सावन भादों में बेचारी उसके बिना पता नहीं वह कैसे रह रही होगी? भगवान उसका विरह बीवी को दे दे। शुक्र भगवान तेरा जो बीवी मायके चली गई! वरना प्रेमिका सावन भादों में भी सूख कर काँटा हो जाती।

अपनी बीवी के बस में मायके जाने को बैठते ही बीके ने प्रेमिका को जिओ के फ़्री सिम से धमाल करते सूचित किया, “पगली, सुनती हो??”

“मैं तो कबसे तुम्हें सुनते सुनते तंग आ गई हूँ। अब तो तुमसे मिलने को मन बेतवा हो रहा है मेरे कान्हा! मिलन के लिए विरह का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। ऐसे में मैं बह गई तो.....???” प्रेमिका का पंद्रह अगस्त को फ़्लिपकार्ट बंपर सेल से सहत्तर प्रतिशत छूट पर मँगवाया मनुहार।

“अब मुझे और तुम्हें मिलने से कोई नहीं रोक सकता मेरी छम्मक छल्लो! भगवान का बाप भी नहीं। एक गुड न्यूज़! बीवी पूरे भादों के लिए मायके चली गई है।”

“सच??” बीके की प्रेमिका रीतिकाल और आधुनिककाल के संक्रमण काल की नायिका सी प्रसन्न। काश! उसकी सौतन लौट कर ही न आए। उसने मन ही मन कामदेव से प्रार्थना अर्चना की।

“तो अब मैं आ जाऊँ क्या?” प्रेमिका ने बीके से पूछा तो बीके ने शंकित कहा, ”नहीं प्रिय! भादों में प्रेमी ही अपनी प्रेमिका के पास आया शोभा देता है। मैं ही कल सुबह की ट्रेन से आ रहा हूँ। सबसे आगे वाले डिब्बे में बैठकर,” बीके ने बीवी की फोटो को ग़ुस्साते बात की तो प्रेमिका ने अंबानी का लख-लख धन्यवाद किया। जुग जुग जिओ अंबानी जी! भगवान करे, आपका फ़्री का सिम धरती पर ही नहीं , स्वर्ग में भी धूम मचाए। आपके इस देशहिती प्लान से नर ही नहीं, नारायण भी पगलाएँ।

घड़ी ने ज्यों ही ब्रह्म मुहूर्त के चार बजाए कि वह सावन भादों की बौछार में बिन छाते ही भीगता हुआ निकल पड़ा ट्रेन पकड़ने, यह सोचता कि पता नहीं उसकी प्रेमिका उसके बिन कैसी रही होगी रात भर?? जब आसमान में भादों के बादल गरजते होंगे तो बेचारी के दिल पर राम जाने क्या बीतती होगी? वह अपने बीमार होने को छोड़ बारिश में भीगता-भीगता अपनी प्रेमिका के बारे में ही सोचते-सोचते रेलवे स्टेशन पहुँचा। उसे वहाँ पहुँच लगा ज्यों उसकी प्रेमिका के घर जाने वाली ट्रेन आज बाज के पंख लगाकर खड़ी हो। दूर-दूर तक बाढ़ का फैला पानी उसे ऐसा लग रहा था मानों इंद्र ने उसे उसकी प्रेमिका तक जल्दी पहुँचाने के लिए अमृत से खाइयाँ भर धरा को समतल कर दिया हो ताकि वह अपनी प्रेमिका से शीघ्र से शीघ्र मिल सके।

उसने आव देखा न ताव और बिन टिकट ही रेल के डिब्बे में जा चढ़ा। सोचा, टीटी टिकट पूछेगा तो अपना विवाहित बेताब दिल भीगी कमीज़ के बटन खोल उसे दिखा देगा। और वह भी जो विवाहित इश्क़िया हुआ फिर तो....

ज्यों ही बीके दिल को सँभालता, प्रेमिका से मिलने के सपने दर सपने बुनता, उधेड़ता ट्रेन में चढ़ा कि दस किलोमीटर बाद ही ट्रेन रेल विभाग की आम लापरवाही के चलते हादसे की शिकार हो गई। ....जो बीके प्रेमिका से मिलने बड़ा सज-धज कर चला हुआ था वह जा पहुँचा यमराज के दरबार में। रेल हादसे में मरी आत्माओं की चीख पुकार सुन यमराज अचानक रेस्ट करते जागे, ”ये क्या? ये चीख पुकार कैसी चित्रगुप्त?”

“प्रभु! अपने देश में अचानक फिर एक और हादसा हो गया है। उसीके हताहत अपने गंतव्य पर पहुँचने के बदले आप के पास आ गए हैं सर,” चित्रगुप्त ने रूटीनन कहा।

तभी यमराज की नज़र इत्र सेंट मली बीके की आत्मा पर पड़ी तो वे चौंके, हद है यार! ज़िंदे जी तो इत्र सेंट का फंडा समझ में आता है, पर मरने के बाद भी। यह जीव कुछ अधिक ही इश्क़िया लगता है। सो उन्होंने उसे अपने पास बुलाते कहा, ”हे इश्क़िए जीव! प्रेमिका की गली भूल यम की गली कैसे आए? प्रेमिका के गम में फंदा लगाया क्या?”

“नहीं हुज़ूर? विवाहित प्रेमी तो हमेशा ही फंदे की ज़द में रहता है। फंदा तो कहीं वो न लगा ले बेचारी।”

“वो कौन? प्रेमिका?”

“नहीं बीवी।”

“तो बीवी को लाने मायके जा रहे थे क्या? उसे मायके से लाने का बेकार में पंगा क्यों ले लिया तुमने? विवाह के बाद बीवी मायके में ही अच्छी लगती है।”

“नहीं हुज़ूर! वह मायके गई थी तो प्रेमिका से मिलने जा रहा था,” बीके का जीव कुछ झेंपा । विवाहित प्रेमी की यही दशा होती है।

“गुड! वैरी फन्नी, तो??”

“रेल हादसे में मेरी मौत हो गई। बदन में प्रेमिका को इम्प्रेस करने को मला सब आर्गेनिक इत्र सेंट धरा का धरा रह गया। मेरे बिन बेचारी मेरी प्रेमिका के पता नहीं क्या हाल होंगे? इससे पहले की मेरी बीवी मायके से लौट आए, मुझे मेरी प्रेमिका के पास भेज दो प्रभु!” कह बीके का इश्क़िया जीव फड़फड़ाने लगा तो यमराज को उस पर बड़ी हँसी आई। आह रे विवाहित इश्क़िए!

“तो कहो, उन्हें क्या दंड दिया जाए?” बीके के जीव की दयनीय दशा देख यमराज ने बीके के जीव से पूछा?

“प्रभु! इन्होंने मेरी प्रेमिका को कहीं का न रखा। इन लोगों ने व्यवस्था का सत्यानाश करके रख दिया है। हद होती है लापरवाही की भी। तंत्र इतना चर्रमरा गया है कि कोई अपनी प्रेमिका से मिलने भी सकुशल नहीं पहुँच सकता। दुश्मनों से मिलना तो पहले ही ख़तरे से खाली न था पर अब प्रेमी सज्जनों से मिलने जाने में भी ख़तरे ही ख़तरे। रेल वालों को किसी की परवाह ही नहीं।”

“अरे पगले, इस देश में जो एक बार सरकारी नौकर हो गया, उसके बाद उसे परवाह है ही किसकी? सरकारी नौकरी में न होने पर जो कल तक अपने से बात करने से भी कतराता था, नौकरी लगते ही वह भगवान से ज़ुबान लड़ाने का माद्दा रखने लगता है।”

“तो ऐसे लोगों को अविलंब बिना क़ानून की किताब खोले मृत्यु दंड दीजिए प्रभु और मुझे दूसरा शरीर ताकि मैं अपनी वियोग में जलती प्रेमिका से यथा शीघ्र मिल सकूँ,” कह बीके के प्रेमिका से मिलने को आतुर फड़फड़ाते जीव ने यमराज के आगे हाथ जोड़े तो यमराज ने कहा, ”हे बीके के विवाहित इश्क़िए जीव! सरकार ने उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई के संकेत दे दिए हैं। कुछ बदल दिए गए तो कुछ से बदला ले लिया। अब सरकार का खून चाहता है क्या?”

“पर सर! देश के प्रेमी वोटर आख़िर कब तक इस पंगु तंत्र की लापरवाही के हाथों....इससे बेहतर तो मैं उससे घोड़ा गाड़ी में ही मिलने चला जाता। देर होती तो होती, पर अँधेर तो न होता,” बीके का जीव आक्रोश पर उतर आया तो यमराज ने उसे समझाते कहा,”कूल डाउन डियर! कूल डाउन! यहाँ कुछ नहीं बदलने का। इसलिए त्रासदी के हिसाब से इस देश का हर जीव अपने को बदल ले, इसी में इस देश के हर जीव की भलाई है। सरकार की लापरवाही से हादसे अब कोई नई बात नहीं! यह तो अब हमारे जीवन के अंग बन चुके हैं। वैसे उन्हें सरकार को पुरस्कृत करना चाहिए कि...... भले ही सरकार जनता में हादसे के बाद विश्वास बहाली के लिए कुछ भी करे , पर सच पूछो तो ऐसे हादसे इनडायरेक्टली देश की जनसंख्या कम करने में सरकार के मददगार साबित होते हैं हे बीके के इश्क़िया जीव! यहाँ कीड़ी से कुंजर तक सबके भाग्य में कुछ और लिखा हो या न, पर किसी न किसी हादसे में मरना ज़रूर लिखा है। हादसे इस देश के जीव का परम सौभाग्य हैं। वह क़दम क़दम पर हादसों में से ही गुज़रता है। कभी ऑक्सीजन न मिलने से हादसा, तो कभी ज़रूरत से अधिक ऑक्सीजन मिलने से हादसा । बुरा तो मुझे तब लगता है जब यहाँ कोई अपनी मौत मर कर आता है बीके! अपनी मौत मरे तो इस देश में आकर क्या मरे बीके? गुड लक! हैव अ नाइस बची लाइफ़ इन नरक।” टीवी पर बीके की प्रेमिका ने बीके की मृत्यु पर बीके की पीठ थपथपाते यमराज का दिया ब्रेकिंग बयान सुना तो वह ख़ामोश हो गई। सोचने लगी, अब एक बार फिर नए सिरे से वह किससे प्यार का इज़हार करे? ये प्यार भी कंबख़्त एक हादसा न!


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